दो माह तक चुनाव में व्यस्त रहे अफसरों को जब फुर्सत मिली तो उन्होंने भी खूब होली खेली। हालांकि बहुत से अफसर मानकर चल रहे हैं कि उनकी अगली होली किसी दूसरे जिले में होगी। जल्द ही उन्हें जिले से विदा होना पड़ सकता है। सरकार बदलने के साथ ही उन पर तबादले की तलवार लटकने लगी है। अफसरों का मानना है कि नए वित्तीय वर्ष में तबादलों का दौर तेजी से शुरू हो सकता है।
सपा सरकार के दौरान लगातार ये आरोप लगाए जाते रहे कि महत्वपूर्ण पदों पर जाति विशेष के अफसरों को तरजीह दी जा रही है। आरोप लगाने वालों में भाजपाई भी शामिल थे और अब प्रदेश में उन्हीं की सरकार है। इस मुद्दे को लेकर भाजपाइयों ने आंदोलन तक चलाया। बिजली विभाग में एसडीओ की तैनाती का मामला रहा हो या थानों में इंस्पेक्टर की तैनाती। तहसील और ब्लॉक मुख्यालय स्तर पर हुई तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए। जिला स्तर पर भी अफसरों की तैनाती को लेकर विवाद की स्थिति बनी रही।
यहां तक कि भाजपा के बड़े नेताओं की जनसभाओं में भी गाहे-बगाहे यह मुद्दा उठाया जाता रहा। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश में सरकार के गठन के बाद बड़े पैमाने पर तबादले हो सकते हैं। ब्लॉक, तहसील स्तर से लेकर जिला और मंडल स्तर तक के अफसरों को ताश के पत्तों की तरह फेंटा जा सकता है। इसकी शुरुआत नए वित्तीय वर्ष के साथ हो सकती है। कुछ अफसरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लखनऊ में तो तबादले की सूची भी तैयार होने लगी है। मार्च का महीना बीतने के बाद किसी भी दिन यह सूची जारी की जा सकती है।