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मोहर्रम की गाइड लाइन की भाषा पर मुस्लिम धर्मगुरुओं में बढ़ी नाराजगी

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प्रयागराज। डीजीपी की ओर सेे मोहर्रम को लेकर जारी गाइड लाइन की भाषा को लेकर मुसलमानों में नाराजगी बढ़ रही है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुहर्रम पर जारी गाइड लाइन में इस्तेमाल किए गए कुछ वाक्यों को जज्बात भड़काने वाला बताया है। साथ ही उलेमाओं ने इससे धार्मिक भावना को आहत करने का भी आरोप लगाते हुए इसे निरस्त करने के लिए आवाज उठाई है। चेताया है कि अगर आपत्तिजनक तथ्यों को नहीं हटाया गया तो वह मोहर्रम को लेकर प्रशासन की बैठकों में हिस्सा नहीं लेंगे।
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शिया धर्म गुरु मौलाना जव्वादुल हैदर रिजवी ने मोहर्रम के संबंध में डीजीपी की ओर से जारी की गई गाइड लाइन में इस्तेमाल की गई भाषा को धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए उसे रद करने की मांग की। मौलाना ने कहा कि इस गाइड लाइन में शिया समुदाय की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। मोहर्रम गम मनाने और कर्बला के शहीदों पर मातम व गिरया करने करने के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रशासन ने गाइड लाइन के पेज नंबर- दो पर जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया है वह बर्दाश्त के काबिल नहीं है।
इसी तरह हसनी हुसैनी फाउंडेशन के सदर वजीर खां, एशिया सुन्नी इत्तेहाद कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किताब अली, उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सैयद मोहम्मद अस्करी, चकिया कर्बला कमेटी के नायब सदर शाहिद अब्बास रिजवी व एक दर्जन से अधिक मातमी अंजुमनों के पदाधिकारियों ने गाइड लाइन की भाषा शैली पर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही चेताया है कि अगर आपत्तिजनक तथ्यों को नहीं हटाया गया, उस गाइड लाइन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही मोहर्रम को लेकर किसी भी तरह की प्रशासनिक बैठक का भी बहिष्कार करने का एलान किया गया है।
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