तर्क दिया कि मंदिर पक्ष के इसी तर्क पर ही दावा खारिज हो जाना चाहिए था लेकिन, निचली अदालत ने इसका सही तरह से आकलन नहीं किया। नियमित पूजा की मांग को स्वीकार करते हुए इंतजामिया मसाजिद कमेटी की अर्जी को खारिज कर दिया। अधिवक्ता ने याचिका में मंदिर पक्ष की ओर से दिए गए तर्कों में कई विसंगतियों पर अपना पक्ष रखा।
इसके पूर्व सुनवाई की शुरुआत में इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने जिला अदालत के फैसले को कोर्ट के सामने रखा। बताया कि शृंगार गौरी की पूजा नियमित तौर पर पहले से ही बंद है। मंदिर पक्ष ने इसके पहले नियमित पूजा करने का कभी दावा नहीं किया। उसका दावा आज का है। करीब एक घंटे तक चली बहस के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी।
मामले में वाराणसी के जिला जज ने 12 सितंबर के आदेश से हिंदू पक्ष की महिलाओं की ओर से शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की मांग में दाखिल वाद के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर मुकद्दमे की सुनवाई का आदेश दिया है, जिसे चुनौती दी गई है।