Prayagraj News : बाघंबरी गद्दी मठ में नरेंद्र गिरि को प्रथम पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
- फोटो : अमर उजाला।
इस दौरान महंत की समाधि पर पुष्प अर्पित करने के लिए संतों-भक्तों का तांता लगा रहा। समाधि स्थल पर ही बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन भी किया। मठ बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर बलबीर गिरि ने समाधि स्थल पर मंदिर का निर्माण कराकर महंत की आदमकद प्रतिमा लगाने और उनकी यादों को संजोने के लिए संग्रहालय का निर्माण कराने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि महंत नरेंद्र गिरि की स्मृतियों को संजोने और पीढ़ी दर पीढ़ी याद रखने के लिए उनकी निशानियों को एक स्थान पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। मठ बाघंबरी गद्दी परिसर में ही इसके लिए भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया जाएगा।
Prayagraj News : बाघंबरी गद्दी मठ में महंत नरेंद्र गिरि को प्रथम पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
- फोटो : अमर उजाला।
शिवपाल यादव ने भी बाघंबरी मठ ने अर्पित की श्रद्धांजलि
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की प्रथम पुण्यतिथि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रगतिशील समाज पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल यादव भी पुण्य तिथि पर पहुंचे। उन्होंने भी प्रसाद ग्रहण किया और नरेंद्र गिरि को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
Prayagraj News : बाघंबरी गद्दी मठ में महंत नरेंद्र गिरि की पुण्य तिथि पर प्रसाद ग्रहण करते शिवपाल य
- फोटो : अमर उजाला।
मठ के आगंतुक कक्ष में फंदे से लटका मिला था महंत का शव, एक साल बाद भी नहीं खुला मौत का राज
महंत नरेंद्र गिरि की मौत का राज एक साल बाद उनकी पुण्यतिथि पर भी पहली बना रहा। 20 सितंबर 2021 को मठ के आगंतुक कक्ष में पंखे के हुक से लगे नायलॉन के रस्से के सहारे उनका शव लटकता हुआ पाया गया था। सीबीआई जांच के बाद भी अभी तक महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर जितने मुंह उतने सवाल बने हुए हैं। महंत के कमरे में एक सुसाइड नोट भी मिला था। सुसाइड नोट में आनंद गिरि को आत्महत्या के लिए मजबूर करने और उकसाने का आरोप था। महंत बलवीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। शनिवार को पुण्यतिथि पर जुटे कई संत दबी जुबान से कहते सुने गए कि महंत नरेंद्र गिरि लिखना जानते ही नहीं थे। ऐसे में सुसाइड नोट की असलियत पर पर अभी भी सवाल खड़े हैं।
15 सौ लीटर दूध से बनी विशेष खीर
महंत नरेंद्र गिरि को खीर बहुत पसंद थी, इसलिए प्रथम पुण्यतिथि पर 15 सौ लीटर दूध से विशेष खीर बनाकर परोसी गई। इसके अलावा उनकी पसंद के खई व्यंजन तैयार किए गए। भोजन में दो तरह की सब्जी, कचौरी, खीर और रायता परोसा गया।