हालांकि, मतदान से दो दिन पहले प्रत्यक्ष रूप से पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले 27 बागियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, लेकिन पार्टी को कमजोर करने की कोशिशों पर पूरी तरह विराम नहीं लग सका। इसके अलावा महापौर का टिकट न मिलने से नाराज पार्टी नेताओं और उनके समर्थकों की वजह से भी नुकसान होने की बात कही जा रही है। कई इलाकों में भाजपा के परंपरागत वोटर घरों से निकले ही नहीं।
दो दिन से शुरू हुई समीक्षा में इस चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने वालों में कई नेताओं का नाम सामने आया है। अब उनकी सूची तैयार की जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रयागराज के नगर निगम चुनाव में भितरघात को प्रदेश नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। ऐसे में इस तरह की विरोधी भूमिका निभाने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। इसमें शक्ति केंद्रों के अलावा पन्ना प्रमुखों, मंडलों के पदाधिकारियों की भी भूमिका जांच के घेरे में है। चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।