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एमपीएमएलए कोर्ट : नंद किशोर रुंगटा अपहरण कांड में वादी का दर्ज हुआ बयान

Fri, 22 Oct 2021 11:04 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
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मुख्तार अंसारी - फोटो : सोशल मीडिया
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स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए में मुख्तार अंसारी के खिलाफ 24 साल पुराने नंदकिशोर रुंगटा अपहरण कांड में वादी महावीर प्रसाद रुंगटा का बयान दर्ज किया गया है। प्रकरण की सुनवाई स्पेशल कोर्ट के जज आलोक कुमार श्रीवास्तव के समक्ष हुई और वादी का बयान एडीजीसी राजेश कुमार गुप्ता एवं विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार सिंह ने कराया। मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग न जुड़ने के कारण पेश नहीं हो सका।
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अदालत ने मुख्तार अंसारी की ओर से प्रस्तुत डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र एक माह पूर्व खारिज कर मुख्तार के विरुद्ध आरोप तय किया था। आरोपों से इंकार कर मुख्तार अंसारी ने गवाहों को परीक्षित कराए जाने की मांग की थी। जिस पर अदालत ने अभियोजन पक्ष से गवाहों को पेश करने का आदेश दिया था। घटना वाराणसी जिले के थाना भेलूपुर की है।

वादी महावीर प्रसाद रुंगटा ने एक दिसंबर 1997 को मुकदमा दर्ज कराया था कि पांच नवंबर 1997 को शाम पांच बजे टेलीफोन पर उन्हें मुख्तार अंसारी ने धमकी दी थी कि अगर पुलिस का सहयोग करेंगे तो बम से उड़ा दिया जाएगा। वादी के भाई नंदकिशोर रुंगटा का 22 जनवरी 1997 को अपहरण हुआ था।  पुलिस ने प्रकरण में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। जिसकी सुनवाई अब स्पेशल कोर्ट में की जा रही है।
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अशरफ के दो मामले की पत्रावली सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट पहुंची
हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में पूर्व विधायक खालिद अजीज उर्फ अशरफ की दो पत्रावली शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए को सीजेएम कोर्ट द्वारा सुपुर्द की गई। स्पेशल कोर्ट के जज आलोक कुमार श्रीवास्तव ने पत्रावली पर सुनवाई कर अभियुक्त को सम्मन जारी किया और तीन नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अशरफ को पेश किए जाने का आदेश दिया है  अशरफ बरेली जेल में बंद है। अभी तक पत्रावली सीजेएम के न्यायालय में थी।

प्रकरण थाना धूमनगंज का है। सूरज कली ने 11 जुलाई 2016 को  थाने में अशरफ और उनके साथियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। अशरफ और उनके साथियों पर जमीन के विवाद में धमकाने और नही मानने पर गोली मारकर हत्या और जानलेवा हमला कर घायल करने का आरोप है। 
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लेबर कोर्ट का एक पक्षीय अवार्ड रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई का अवसर दिए बगैर नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध श्रम अदालत आगरा द्वारा 29 मई 21 को जारी अवार्ड को रद्द कर दिया है और साक्ष्य के साथ नये सिरे से केस दायर करने तथा श्रम अदालत को नियमानुसार निर्णीत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची कंपनी को आदेश दिया है कि वह श्रमिक को 50 हजार रुपये का छह हफ्ते में भुगतान करे। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने वरुण वेवरेजेज लिमिटेड कंपनी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सुनील कुमार त्रिपाठी ने बहस की।

इनका कहना था कि श्रम अदालत ने कंपनी का पक्ष सुने बगैर श्रमिक को बकाया वेतन भुगतान के साथ बहाली करने का अवार्ड दिया है। जबकि श्रमिक के खिलाफ हत्या का केस दर्ज था। उसने यह छिपाकर नौकरी प्राप्त की। जब उसे आजीवन कारावास की सजा मिली तो याची को पता चला। जिससे सेवायोजक का श्रमिक पर से विश्वास उठ गया है। इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया गया। कोर्ट ने प्रकरण को नए सिरे से साक्ष्यों पर विचार कर दोनों पक्षों को सुनकर तय करने का निर्देश दिया है।
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