जिले में ही नहीं मंडल में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में सामान्य दिनों में 70 से 80 ऑपरेशन किए जाने का रिकार्ड है। हर दिन अलग-अलग विभागों के लिए ओटी निर्धारित हैं। ट्रामा और इमरजेंसी समेत एसआरएन में सात माड्यूलर ओटी हैं। कोरोना काल में ऑपरेशन बंद हुए तो दो ओटी
में मरम्मत का काम चल रहा है। एक अप्रैल से 15 मई तक एसआरएन में ऑपरेशन नहीं किए गए। मई भर यही स्थिति बनी रहने की उम्मीद है। सर्जरी के नाम पर शुरुआती दौर में तो इक्का-दुक्का दुर्घटना में घायल या बर्न के मामले तो आए, लेकिन कर्फ्यू की अवधि में ट्रामा ओटी भी कई दिनों से ठप है। यहां तैनात सर्जन भी खाली समय का सद्उपयोग कोविड हेल्प सेंटर में सेवाओं से कर रहे हैं।
विभागाध्यक्ष सर्जरी डॉ. शबी अहमद के मुताबिक सर्जरी तो बंद है, लेकिन विभाग के 22 डॉक्टर, स्टाफ कोविड आईसीयू, एचडीयू सहित अन्य वार्डों में कोविड मरीजों के उपचार में लगाए गए हैं। यही नहीं ऑपरेशन के ऐसे मामलों में जिनमें लोगों की जान पर बन आई हो तो ट्रामा ओटी में करीब दस लोगों के ऑपरेशन किए गए। हॉर्निया, हड्डी की टूटफूट, न्यूरो, पाइल्स जैसी दिक्कतों से पीड़ित मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं।
मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय कॉल्विन में भी अब सामान्य मरीजों का इलाज तो जैसे तैसे किया जा रहा है, लेकिन सर्जरी का काम ठप है। यहां दिन भर में दस ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुषमा श्रीवास्तव के मुताबिक शासनादेश का अनुपालन कर मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए सर्जरी टाली जा रही हैं। गंभीर मामले एसआरएन रेफर किए जाते हैं।
तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय बेली में और मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में भी सर्जरी का काम ठप है। बेली एल टू कोविड अस्पताल बना है, इसलिए यहां सामान्य मरीजों की पट्टी तक नहीं हो रही है। ट्रामा सेंटर कोविड के गंभीर मरीजों का आईसीयू बना है। औसतन दिन भर में दस आंखों के और पांच सामान्य सर्जरी होती रही है, जो चार अप्रैल से बंद है।