पानी में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं। पानी में मौजूद लेड, कैडमियम, क्रोमियम, मर्करी, आर्सेनिक जैसी भारी धातुएं शरीर में अलग-अलग माध्यम से जमा होने के कारण कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों को जन्म देती हैं।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की प्रोफेसर अंजना पांडेय ने एक ऐसा सेंसर तैयार किया है, जो पीने के पानी में हैवी मेटल (भारी धातुओं) का आसानी से पता लगा लेगा। इससे पता चल सकेगा कि आप जो पानी पी रहे हैं, वह पीने लायक है भी या नहीं। इस सेंसर का नाम ‘साइमलटेनियस डिटेक्शन ऑफ हैवी मेटल फ्रॉम डिफ्रेंट वाटर सेटिंग यूजिंग गोल्ड नैनो पार्टिकल’ रखा गया है।
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दरअसल, पानी में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं। पानी में मौजूद लेड, कैडमियम, क्रोमियम, मर्करी, आर्सेनिक जैसी भारी धातुएं शरीर में अलग-अलग माध्यम से जमा होने के कारण कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों को जन्म देती हैं।
इसका असर बच्चों के विकास पर भी पड़ता है। जिससे बच्चों में मानसिक विकार की समस्या बढ़ने का भी खतरा रहता है। प्रो. अंजना पांडेय द्वारा बनाए गए इस सेंसर से हैवी मेटल का पता लगाने के साथ ही उसकी मात्रा का भी पता लग सकेगा। इस सेंसर का उपयोग प्रो. अंजना ने सबसे पहले एमएनएनआईटी में होने वाली पानी की सप्लाई में किया। इसका पेटेंट भी कराया जा चुका है।
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एक साल में तैयार हुआ सेंसर
प्रो. अंजना बताती हैं कि लोगों में लगातार कैंसर समेत अन्य कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसको देखते हुए उनको इस तरह का सेंसर तैयार करने का ख्याल आया। पिछले साल उन्होंने सेंसर तैयार करने की शुरुआत की थी। इसे बनाने में करीब एक साल का समय लगा।