कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट पर अधिकारी की कंप्लेंट पर मजिस्ट्रेट का संज्ञान लेना गलत नहीं है और बिना अधिकृत अधिकारी के कंप्लेंट के पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेना वैध नहीं कहा जा सकता। इस आधार पर कोर्ट ने संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया है और अधिकृत अधिकारी को नियमानुसार कम्पलेंट दाखिल करने की छूट दी है। यदि कम्पलेंट दाखिल होती है तो मजिस्ट्रेट संज्ञान लेकर समन जारी करें।
यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. वाई के श्रीवास्तव ने चोपन, सोनभद्र के राम बहाल की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका में 30 मई 19 की पुलिस चार्जशीट, 27 अगस्त 20 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनभद्र द्वारा संज्ञान लेने व राज्य सरकार बनाम दिनेश शर्मा व अन्य केस कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी। याची का कहना था कि यदि भारतीय दंड संहिता व माइंस एंड मिनरल एक्ट दोनों में अपराध हुआ है तो एक कानून में ही केस चलेगा।
दोनों कानूनों में केस चलाना एक अपराध पर दोहरी कार्यवाही मानी जाएगी, यह गलत है। सरकार का कहना था कि यदि दो भिन्न अपराध हैं तो अलग-अलग आपराधिक कार्यवाही की जाएगी। यदि पट्टे की शर्तों के विपरीत अवैध खनन किया गया है तो माइंस एंड मिनरल एक्ट के तहत कार्यवाही होगी। यदि बिना पट्टे या लाइसेंस या प्राधिकार के खनन किया गया है और बेईमानी से ट्रांसपोर्ट करता है तो भारतीय दंड संहिता के तहत कार्यवाही होगी। कोर्ट ने कहा खनन पट्टे की शर्तों के विपरीत धारा 4 के विरुद्ध खनन किया गया है तो धारा 21 का अपराध है और चोरी का भी अपराध है। दोनों कानूनों के तहत कार्यवाही होगी। इस पर कोई रोक नहीं है।