सूत्रों का कहना है कि अब पता चला है कि माइकल सात अप्रैल को जमानत पर जेल से रिहा हो गया। इसके बाद उसने शहर छोड़ दिया। यह भी कहना है कि इससे पहले उसकी जेल बदली की भी तैयारी चल रही थी। उधर, वर्तमान में उसके वाराणसी में रहने की सूचना गोपनीय तरीके से आला अफसरों के पास पहुंची है। हालांकि, कर्नलगंज इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी मिलने की बात से इन्कार कर रहे हैं। उनका कहना है कि माइकल के जमानत पर रिहा होने की जानकारी मिली है। उसकी तलाश की जा रही है और उसे जल्द ही जिला बदर की कार्रवाई से संबंधित नोटिस तामील कराया जाएगा।
2020 में चालानी रिपोर्ट, चार साल बाद कार्रवाई
माइकल पर जिला बदर की कार्रवाई चार साल बाद हुई। अक्तूबर 2020 में कर्नलगंज पुलिस की चालानी रिपोर्ट पर अपर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की थी। हालांकि, इसके बाद आगे की कार्रवाई लंबित रही। जब यह मामला पुलिस आयुक्त रमित शर्मा के न्यायालय में पहुंचा तो उन्होंने संज्ञान लेकर अभियुक्त को नोटिस जारी कर तलब किया। सुनवाई के बाद उसके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की।
हत्या के प्रयास में सुनाई गई है 10 साल की सजा
मूलरूप से बिहार के कैमूर भभुआं, सिकरी निवासी माइकल को 2012 में छात्रनेता अभिषेक सिंह सोनू पर जानलेवा हमले के मामले में 10 साल की सजा भी सुनाई जा चुकी है। उसके खिलाफ मारपीट, धमकी, जानलेवा हमला समेत 18 मु़कदमे दर्ज हैं। 2019 में इविवि छात्रसंघ चुनाव के दौरान उस समेत चार पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित किया गया था।