इलाहाबाद। हिमालयी क्षेत्र की पछुवा और बंगाल की खाड़ी से आई नम पुरवइया के गठजोड़ ने एक बार फिर मौसम बदल दिया है। इसका असर रहा कि फागुन में न सिर्फ रिमझ्मि बारिश हुई वरन पारा भी नीचे चला गया। चौबीस घंटे के भीतर पारे ने 7.3 डिग्री का गोता लगाया। मौसम का मिजाज शनिवार रात में ही बिगड़ गया था। आसमान में छाए बादलों ने संकेत दे दिया था कि अगले दो-तीन दिनों तक सब कुछ ठीक नहीं रहने वाला है।
रविवार सुबह से ही रिमझिम बरसात शुरू हुई तो देर रात तक होती रही। मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकतम तापमान 20.3 डिग्री और न्यूनतम 18.8 डिग्री पर पहुंच गया। जबकि एक दिन पूर्व अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले 48 घंटे तक तक मौसम का यही मिजाज देखने को मिलेगा। घने बादलों के साथ हल्की बूंदाबांदी के साथ तेज हवाएं चलेंगी।
बारिश और ठंड का परिणाम रहा कि शहरी दिन भर घरों में दुबके रहे। रविवार का दिन होने की वजह से सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों ने परिजनों संग छुट्टी मनाई। सड़कों पर महज वही लोग दिखायी दिए, जिन्हें विशेष परिस्थितियों में बाहर निकलना पड़ा। दूसरी ओर बारिश के चलते सड़कों के किनारे गड्ढों में पानी जमा हो गया। सड़कों पर फिसलन से कई दुपहिया वाहन चालक फिसल गए, जिन्हें चोटें आईं।
चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो बारिश बीमारियों को भी साथ लेकर आई है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार माथुर के मुताबिक मौसम का बदला मिजाज बीमारियों के लिहाज से बेहद खतरनाक है। इस मौसम में वायरल बुखार, सर्दी, जुकाम होने के साथ ही सांस की समस्या बढ़ सकती है। बकौल डॉ. माथुर मौसम का जो उतार चढ़ाव है, इसमें एहतियात बरतने की जरूरत हैं।
मौसम विज्ञानी और विवि में प्रोफेसर डॉ. एसएस ओझा के मुताबिक मौसम का बदला मिजाज ‘लास्ट वेस्टर्न डिस्टर्वेंस ’ का नतीजा है। दूसरी ओर ग्लोबल वार्मिंग के साथ ही पृथ्वी के अक्षीय घुमाव में आई कमी से भी पूरी दुनिया में मौसम का बदला मिजाज देखने को मिल रहा है। अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में जहां बार बार बर्फीले तूफान आ रहे हैं, वही दुनिया के तमाम इलाकों में असमय बारिश हो रही है। बकौल प्रो. ओझा पृथ्वी का अक्षीय घुमाव जो 23.5 डिग्री है, उसमें एक डिग्री की कमी आई है।
बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। उप कृषि निदेशक डॉ. भूपेंद्र वीर सिंह के मुताबिक एक मार्च को तेज तूफान और बारिश ने फसलों को पहले ही नुकसान पहुंचाया था। रही सही कसर इस बार की बारिश ने पूरी कर दी है। बारिश से सरसों, आलू, मसूर, चना, मटर को भारी नुकसान हुआ है। दलहनी फसलें खेतों में पककर तैयार थीं, जिसकी कटाई चल रही है लेकिन बारिश ने अरमानों पर पानी फेर दिया है।