साथ ही अपनी ओर से रेवेन्यू सर्वेयर और हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी करने की मांग वाली अर्जी दाखिल की। इस पर मंदिर ट्रस्ट के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी, प्रणव ओझा सहित अन्य अधिवक्ताओं की ओर से कोई विरोध नहीं किया गया। वाद संख्या तीन के अधिवक्ता ने एडवोकेट कमीशन को निस्तारित करने की मांग की। मामले में पक्षकार भारत सरकार और एएसआई की ओर से अधिवक्ता मनोज सिंह की ओर से जवाब दाखिल करने का समय मांगा गया। जबकि, मुस्लिम पक्ष ने पक्षकार बनने की मांग की।
कोर्ट ने कहा 11 जनवरी के आदेश में सिविल वादों को कंसोलिडेटेड (एक साथ सुनवाई) करने का आदेश दिया गया था। एक केस को मुख्य मानकर सुनवाई करने का फैसला लिया गया है। कोर्ट ने सहयोग के लिए न्यायमित्र की जरूरत महसूस की और वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल को न्यायमित्र नियुक्त किया है। साथ ही कार्यालय को जरूरी दस्तावेज उन्हें मुहैया कराने का आदेश दिया है।
वाद संख्या चार की पैरवी कर रहे आशुतोष पांडेय ने वाद की पैरवी के कारण उन्हें धमकी दिए जाने का हवाला देते हुए एसएसपी मथुरा को सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश जारी करने की प्रार्थना की। इस पर कोर्ट ने उन्हें सक्षम अधिकारी के समक्ष अर्जी देने को कहा है। इनका सिविल वाद में पक्षकार बनाने की अर्जी पर मंदिर पक्ष की तरफ से आपत्ति दाखिल की गई। कोर्ट ने वाद संख्या 17 में मंदिर पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजय सिंह सहित कुछ अन्य पक्षकारों की तरफ से दाखिल अन्य अर्जियों पर विपक्षी से आपत्ति दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई की तिथि 30 जनवरी नियत की है।