पायलट बाबा के शिष्य दिव्यानंद गिरि मौत के प्रकरण में ताजा खुलासे से बेहद आहत हैं। वह कहते हैं कि पायलट बाबा महायोगी थे। उनकी हत्या की गई है तो इसकी गहराई से जांच की जानी चाहिए। हत्यारों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। महाकुंभ में पहुंच रहे दूसरे शिष्य और अनुयायी भी खुलासे से बेहद आहत हैं।
जूना अखाड़े के प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि कहते हैं कि पायलट बाबा अपने जीते-जी अपनी तीन प्रमुख शिष्याओं के नाम वसीयत कर गए हैं। इनमें मठ की उत्तराधिकारी केको आईकावा उर्फ योगमाता कैला को बनाया गया है, जबकि योगमाता श्रद्धा और योगमाता चेतना गिरि को भी उन्होंने संपत्ति की देखभाल का सहयोगी बनाया है। लेकिन, कुछ लोग उत्तराधिकारी बनाने और संपत्ति हड़पने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे।