विभागीय स्तर पर भी बैठी जांच
विभागीय जांच में पता चला कि पेंशन लेने के लिए कई तरह के फर्जी दस्तावेजों को इस्तेमाल किया गया है। राजेश ने कुल सात साल आठ महीने तक पेंशन ली है। ऐसे में शक है कि विभाग में किसी के मिली भगत होने से इतने सालों से पेंशन का पैसा जाता रहा। इसलिए किसी को भनक तक नहीं लगी।
वहीं, विभागीय स्तर पर भी कर्मियों की भूमिका को लेकर जांच बैठ गई है। वहीं, थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि अपर नगर मजिस्ट्रेट की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमे की विवेचना की जा रही है। जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी।