याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने भी कोर्ट में पक्ष रखा और कहा कि एसआईटी का गठन 15 जुलाई 2021 को हुआ, जिसमें सात अधिकारियों को शामिल किया गया था। कहा गया कि एडिशनल एसपी रैंक के जिस अधिकारी ज्ञानेंद्र प्रसाद ने आरोप पत्र दाखिल किया है। वह उन सात अधिकारियों में शामिल नहीं थे।
बहस की गई कि आरोपी सुषमा सागर की धारा 302, 376, 511 व पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तारी की गई थी। अब आरोप पत्र में उसके खिलाफ सब धाराएं हटाकर केवल 306 लगाई गई है और इस कारण आरोपी की जमानत भी हो गई। कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट जनवरी 22 में दाखिल हो गई है और इस एसआईटी अभी भी जांच कर रही है। वहीं सरकार की तरफ से नियुक्त विशेष अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी का कहना था कि एसआईटी जांच में शामिल सात अधिकारियों के नाम को बढ़ाकर टीम के सदस्यों की संख्या 11 कर दी गई थी और उसमें एडिशनल एसपी ज्ञानेंद्र प्रसाद का नाम शामिल है। कहा गया कि जांच अधिकारी ने अपनी पूरी क्षमता व ज्ञान के साथ जांच पूरी की है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल को तलब किया था। कोर्ट के रुख को देखते हुए पूर्व डीजीपी ने एडिशनल एसपी, पुलिस क्षेत्राधिकारी व अन्य पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर जांच बैठा दी थी। कोर्ट ने लड़की के माता-पिता को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दे रखा है।