अधिकतर सनातनी परिवारों में कलश स्थापना होने की वजह से कई पुरोहितों को तीन से चार यजमानों के यहां मां दुर्गा का आह्वान कराना पड़ा। कोरोना महामारी में पुत्र और पति की जान बचने की खुशी में इस बार लूकरगंज की श्रद्धा शुक्ला ने कलश स्थापना की। लूकरगंज में दुर्गापूजा पार्क के सामने वाली गली में विमला देवी ने घर-परिवार की समृद्धि के लिए कलश की स्थापना की। इसी तरह गोविंदपुर की श्रद्धा सिन्हा ने भी कलश स्थापन किया।
मीरापुर के वैदिक आचार्य पं. ओम पांडेय ने इस दोनों की स्थानों पर कलश स्थापना कराई। इसी तरह ज्योतिषाचार्य पं. बृजेंद्र मिश्र ने कई जगह कलश स्थापना कराई। दारागंज के तीर्थपुरोहित पं. रितुराज मिश्रा भी दिन भर कलश स्थापना में व्यस्त रहे। इस बार नवरात्र के प्रथम दिन कलाश स्थापना के लिए पुरोहित ढूंढे नहीं मिल रहे थे। इसी के साथ कलश में गंगा का जल, चांदी-तांबे का सिक्का और सुपारी के रूप में मां दुर्गा का आह्वान किया गया। कलश के ऊपर नारियल सजाए गए। मां को लाल चुनरी और तरह-तरह का भोग अर्पित किया गया। इसी के साथ अखंड दीप जलाकर नौ दिवसीय व्रत, अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई।
भयबाधा से मुक्ति के लिए अनुष्ठानों की होड़
भय बाधा से मुक्ति के लिए नवरात्र के अनुष्ठानों की इस बार होड़ मची रही। सुबह ही फूलों, रंगोलियों और तरह-तरह के हल्दी-चंदन के स्वास्तिक और ऊं के प्रतीकों से सजी वेदियों पर कलश स्थापना आरंभ हुई। गंगा की रेत से तैयार वेदियों पर मंगल कामना के जौ उगाए गए।