मामले की जांच कर रही है सीबीआई
विवेचना के दौरान आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी का नाम प्रकाश में आया था। आरोप पत्र के मुताबिक नरेंद्र गिरि को इस बात का डर सता रहा था कि उनका शिष्य आनंद गिरि किसी महिला की कथित संपादित वीडियो समाज में सार्वजनिक कर सकता है, जिससे उनकी सामाजिक छवि खराब हो जाएगी। इससे व्यथित और चिंतित महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या कर ली। मौके से नायलॉन की रस्सी, चाकू, दो मोबाइल और 13 पेज का सुसाइड नोट मिला था।
नरेंद्र गिरि की मौत से पर्दा उठाने की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने 20 नवंबर 2021 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इसमें आनंद गिरि के साथ आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी को आपराधिक षड्यंत्र रचने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाया गया। आनंद गिरि को चित्रकूट और बाकी आरोपियों को नैनी जेल में ही निरुद्ध किया गया है।
कई तिथियों पर अदालत में नहीं हाजिर हो रहे अमर गिरि
मामले का विचारण शुरू हुआ तो एफआईआर दर्ज करवाने वाले अभियोजन के गवाह अमर गिरि और पवन महाराज को गवाही के लिए पेश होने का नोटिस जारी किया गया। नोटिस तामील कराए जाने के बावजूद दोनों लगातार गवाही की तिथियों पर गायब रहे। मंगलवार को नियत तारीख पर भी अमर गिरि गायब पाए गए, तो जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुलाब चंद्र अग्रहरि ने अदालत में अर्जी दाखिल कर अभियोजन के गवाह अमर गिरि को गिरफ्तार कर अदालत में गवाही के लिए पेश होने का आदेश पारित करने की मांग की। गवाही के लिए नियत तिथियों पर लगातार जानबूझ कर गायब रहने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए सत्र न्यायालय ने अमर गिरि और पवन महाराज उर्फ राम जी शुक्ला के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर 13 नवंबर को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।
नहीं लिखाई एफआईआर, पुलिस ने सादे कागज पर कराए थे दस्तखत
विचारण में गवाही से गायब मुकदमा वादी अमर गिरि और पवन महाराज ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर चुके हैं। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने आनंद गिरि के खिलाफ एफआईआर नहीं लिखाई है। न ही किसी को नामजद कराया है। पंचनामा पर हस्ताक्षर लेते समय पुलिस ने सादे कागज पर उनके दस्तखत लिए थे। सादे कागज पर पुलिस ने क्या लिखा उन्हें कुछ नहीं मालूम।