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Narendra giri Case : 101 गवाहों, सुनवाई और तारीखों में ही उलझा महंत की मौत का मामला, लग रही तारीख पर तारीख

Fri, 20 Sep 2024 02:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

20 सितंबर 2021 को बाघम्बरी स्थित मठ के अतिथि कक्ष में महंत नरेंद्र गिरि फंदे से लटके मिले थे। अमर गिरि की तहरीर और सुसाइड नोट के आधार पर जार्जटाउन पुलिस ने महंत के शिष्य आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मुकदमा लिखा था। 
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नरेंद्र गिरि। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के शुक्रवार को तीन साल पूरे हो गए हैं। केस में 20 पुलिसकर्मियों समेत 101 गवाह बनाए गए हैं, लेकिन मामला सुनवाई और तारीखों में ही उलझकर रह गया है। 33 माह बाद भी दो लोगों की गवाही पूरी नहीं हो सकी है। सिर्फ तारीख पर तारीख लग रही है।

20 सितंबर 2021 को बाघम्बरी स्थित मठ के अतिथि कक्ष में महंत नरेंद्र गिरि फंदे से लटके मिले थे। अमर गिरि की तहरीर और सुसाइड नोट के आधार पर जार्जटाउन पुलिस ने महंत के शिष्य आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मुकदमा लिखा था। जांच करने के बाद पुलिस ने दिसंबर-2021 को चार्जशीट दाखिल किया। तकरीबन 101 गवाह बनाए गए। इसमें पुलिस अधिकार, फॉरेंसिक के अधिकारी, महंत, आश्रम कर्मचारी समेत कई अन्य शामिल हैं।

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306 और 120बी के तहत आरोप तय

आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी के विरुद्ध 306 और 120बी के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष राय की कोर्ट में आरोप तय किए गए। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गुलाब चंद्र अग्रहरि के मुताबिक, अमर गिरि की गवाही के बाद केस को जिला जज संतोष राय ने एडीजे-नौ अंजू कनौजिया की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था।

24 सितंबर को फिर सुनवाई

केस में अब तक अमर गिरि की एक बार गवाही हुई है, जबकि रविंद्र पुरी की गवाही पूरी चुकी है। जिरह चल रही है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। वहीं, वरिष्ठ लोक अभियोजक सीबीआई ने बताया कि केस में तकरीबन 101 गवाह है, लेकिन इनमें मुख्य गवाहों के ही कोर्ट में गवाही होगी।

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लेटलतीफी का माना जा रहा यह कारण

1. सुनवाई को लेकर आनंद गिरि ने केस को जबलपुर ट्रांसफर कराने के लिए याचिका लगाई थी। कहा था कि मामले को प्रयागराज से जबलपुर की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

2. मामले में अमर गिरि का मुख्य गवाह बनाया गया था। एक तारीख पर उसने कोर्ट में गवाही भी दी। इसके बाद कोर्ट को बिना सूचना दिए फरार हो गया। नोटिस भेजने के बावजूद उसका पता नहीं चला। बाद में उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया।

3. चित्रकूट जेल में बंद आनंद गिरि ने जेल ट्रांसफर कराने को लेकर याचिका लगाई थी। कहा कि जेल में किसी को उनसे मुलाकात नहीं कराई जा रही है, इसलिए उसे यूपी की जेल से हटाकर मध्य प्रदेश भेज दिया जाए।

4. केस में करीब 25 तारीखें सीबीआई को दी जा चुकी है, लेकिन, सीबीआई गवाह को पेश नहीं कर पा रही है, इसलिए केस में सिर्फ तारीख पर तारीख लग रही है।

अब तक बने गवाह

पुलिसकर्मी - 20

फॉरेंसिक -10

आश्रम स्टाफ - 05

अन्य - 66

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