पिछले कुंभ में 18 अक्तूबर तक बन गए थे दो पुल
कुंभ 2019 में 22 पांटून पुलों का निर्माण हुआ था। टेंडर की प्रक्रिया अगस्त में पूरी हो गई थी। इसलिए 18 अक्तूबर तक दो पुल तैयार हो गए थे। पुल बनने के बाद अन्य कार्यों के लिए सामग्री उस पार जाने लगती है। इस बार अब तक टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। ऐसे में मेला बसावट में देरी होगी।
30 दिन में होगा एक पुल का निर्माण
एक पुल के निर्माण 30 दिन का समय लगता है। निर्माण के बाद पुलों का रख-रखाव साढ़े तीन महीने तक करना होगा। अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाती तो अन्य कार्य शुरू हो जाते। माघ मेलों में दिसंबर तक पुल बनाते रहते हैं लेकिन महाकुंभ में पुल निर्माण अक्तूबर या नवंबर तक पूरा करना होगा।
इन स्थलों पर बनने हैं पुल
अक्षयवट दक्षिणी पांटून 57 लाख रुपये में और उत्तरी 39 लाख रुपये में बनेगा। महावीर दक्षिण 61 लाख में और उत्तरी 42 लाख में, जगदीश रैंप 57 लाख में, त्रिवेणी दक्षिणी 41 लाख, मध्य 68 और उत्तरी 39 लाख में बनेगा। काली दक्षिणी 44 लाख, मध्य 68 लाख और दक्षिणी 46 लाख में, मोरी 55 लाख, गंगोली शिवाला 49 लाख, ओल्ड जीटी दक्षिणी 28 लाख, उत्तरी 53 लाख, हरिश्चंद्र 62 लाख में बनेगा। सबसे महंगा नागवासुकी पुल 1.13 करोड़ रुपये में बनेगा।
भरद्वाज पुल 88 लाख, अनंत माधव (गंगेश्वर) 89 लाख, फाफामऊ दक्षिणी 62 लाख, उत्तरी 37 लाख, चक्रमाधव 73 लाख में बनेगा। अरैली से झूंसी के लिए दो पुल बनेंगे। इन पर 59 लाख और 53 लाख रुपये खर्च आएगा। इसके अलावा 64 लाख, 54 लाख, 54 लाख, 62 लाख, 62 लाख और 55 लाख रुपये के पांच अतिरिक्त पुल बनेंगे। इनकी जगह अब तक निर्धारित नहीं हुई है।