गंगा की कटान की वजह से इस बार सेक्टर, तीन, चार और पांच में अधिक भूमि आवंटित की जाएगी। ऐसे में बड़ी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं को गंगा पार भेजा जाएगा। इसके लिए भूमि समतलीकरण तेज कर दिया गया है। राजस्व टीम की ओर से कराए गए सर्वे के आधार पर माघ मेले का ले आउट तैयार कर लिया गया है।
इस बार पांच सेक्टर में छह सौ हेक्टेयर भूमि पर माघ मेला बसाया जाएगा। इसके लिए मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। हालांकि छह जनवरी को ही माघ मेले का पहला स्नान है। ऐसे में महीने भर ही समय अब तैयारियों के लिए शेष रह गया है। जिस तरह काम हो रहा है, उससे कहा जा रहा है कि समय रहते इंतजामों को पूरा कर पाना मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
भूमि आवंटन दिसबंर के पहले हफ्ते में
माघ मेले के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया दिसंबर के पहले हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। समूहों में बसने वाली आध्यात्मिक संस्थाओं में दंडीबाड़ा, आचार्यबाड़ा के अलावा खाक चौक को सबसे पहले भूमि आवंटित की जाएगी। इसके बाद तीर्थपुरोहितों की संस्था प्रयागवाल सभा के लिए भूमि आवंटन किया जाएगा।
माघ मेले की तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएंगी। कटान की वजह से सर्वे में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में भूमि कुछ कम मिली है। भूमि सर्वे के साथ ही मूलभूत सुविधाओं के लिए काम कराए जा रहे हैं। माघ मेले का स्वरूप तय कर लिया गया है। - संत कुमार, एसडीएम, मेला।