मामले मेें परिवार अदालत आगरा में अपनी पत्नी शिखा चतुर्वेदी के खिलाफ वाद दायर किया। दोनों की शादी नौ दिसंबर 20 को हुई थी। 31अगस्त 21 को केस दायर करके धारा 13 तलाक केस मानने की अर्जी दी जिसे परिवार अदालत ने यह कहते हुए 28 जुलाई 22 को खारिज कर दिया कि अर्जी मंजूर हुई तो केस दाखिले की तिथि से तलाक केस माना जाएगा।
धारा 14 शादी के एक वर्ष के भीतर तलाक केस बाधित करती है, इसलिए अर्जी मंजूर नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा, विचाराधीन वाद में संशोधन अर्जी मंजूर होने की तिथि से प्रभावी होगी न कि केस दाखिल होने की तिथि से। इसलिए धारा 14 इस मामले में लागू नहीं होगी।