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माघ मेला : गंगा पर छह पांटून पुलों में से चार के खुले टेंडर, 10 सड़कों के लिए नहीं मिलीं फर्म

Wed, 29 Nov 2023 01:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माघ मेला इस बार 15 जनवरी से प्रारंभ होकर आठ मार्च तक चलेगा। करीब 54 दिनों तक चलने वाले मेले को 770 हेक्टेयर में बसाया जाना है। पांच सेक्टरों में विभाजित मेला क्षेत्र में संतों-भक्तों के पहुंचने के लिए तीन करोड़ रुपये की लागत से छह पांटून पुल बनाए जाने हैं।
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पांटून पुल। सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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माघ मेला-2024 के काम अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। मेला शुरू होने में डेढ़ महीने का ही समय शेष है। अभी तक चकर्ड प्लेट सड़कों और पांटून पुलों के टेंडर तक पूरे नहीं हो सके। मंगलवार को गंगा पर प्रस्तावित छह पांटून पुलों में से चार के टेंडर खोले गए। जबकि, 30 में से 10 सड़कों के लिए अभी तक फर्में नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में महाकुंभ के रिहर्सल के रूप में बसाए जाने वाले मेले की तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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माघ मेला इस बार 15 जनवरी से प्रारंभ होकर आठ मार्च तक चलेगा। करीब 54 दिनों तक चलने वाले मेले को 770 हेक्टेयर में बसाया जाना है। पांच सेक्टरों में विभाजित मेला क्षेत्र में संतों-भक्तों के पहुंचने के लिए तीन करोड़ रुपये की लागत से छह पांटून पुल बनाए जाने हैं। इस बार पांटून पुलों का निर्माण अभी शुरू तक नहीं हो सका है। मंगलवार को छह में से चार पांटून पुलों के ही टेंडर खुल सके। इसमें 47.91 लाख रुपये की लागत वाले महावीर पांटून पुल, 52.40 लाख रुपये की लागत के त्रिवेणी, 51.83 लाख रुपये की लागत वाले काली और 48.44 लाख की लागत वाले गंगोली शिवाला पांटून पुल के टेंडर खुल सके।

पहली बार स्वीकृत 51.04 लाख की लागत वाले नागवासुकि पांटून पुल पर आपत्ति की वजह से टेंडर नहीं खुला। इसी तरह 52.73 लाख की लागत वाले ओल्ड जीटी पांटून पुल का भी टेंडर नहीं खुल सका। इसी तरह रेती पर 110 किलोमीटर लंबी चकर्ड प्लेट्स के माध्यम से सड़कें बनाई जानी हैं। इसके लिए कुल 30 सड़कों में से 20 के ही टेंडर हो सके हैं। 10 सड़कों के लिए फर्में आगे नहीं आ सकी हैं। ऐसे में काम और पिछड़ने की आशंका है।

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गंगा की कटान बन सकती है बाधा

महाकुंभ के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बसाए जाने वाले माघ मेले में इस बार गंगा की कटान भी बाधा बन सकती है। महावीर, त्रिवेणी और काली पांटून पुलों का निर्माण कराने के लिए या तो ड्रेजिंग का सहारा लेना पड़ेगा या फिर दो हिस्से में इन स्थानों पर पांटून पुल बनाने पड़ेंगे। इसलिए कि कटान की वजह से इस बार यहां बीच के बड़ेे हिस्से में रेत का टापू उभर आया है। इससे जहां सेक्टर दो और तीन में बसने वाली दर्जनों आध्यात्मिक-सांस्कृतिक संस्थाओं को दूसरे सेक्टरों में शिफ्ट कराना पड़ेगा।

माघ मेले की तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी कराई जाएंगी। छह में से जिन चार पांटून पुलों के टेंडर हो गए हैं, उनके निर्माण दो से तीन दिन के भीतर आरंभ करा दिए जाएंगे। शेष दो पुलों और चकर्ड प्लेट मार्गों की भी निविदा कराकर काम जल्द आरंभ करा दिया जाएगा। - दिनेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, कुंभ मेला डिवीजन।
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