विश्व कल्याण के लिए रखे गए त्रिशूल।
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विश्व कल्याण के लिए रखे गए हैं 5454 त्रिशूल
अयोध्या में रामलला विराजमान के प्राण प्रतिष्ठा के लिए आमंत्रित किए गए महर्षि बाल योगी ने कहा कि आयोध्या में रामलला का दर्शन करने के बाद मन की जो स्थिति हुई वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। रामलला का दर्शन करने के बाद बोलने का सामर्थ्य समाप्त हो चुका था। नेत्र खुले ही रह गए और नेत्रों से जलधारा बह रही थी। यह दशा उनकी ही नहीं बल्कि वहां मौजूद सभी संतों की थी। मकर संक्रांति से शुरू होकर यह यज्ञ महाशिवरात्रि तक चलेगा। सवा करोड़ मंत्रों का जप होगा। इस वर्ष भी यह चल रहा है। यह 38वां वर्ष है।
भूतभावन भगवान शिव का षोडशोपचार पूजन किया। ऋगवेद की संहिता के मंत्रों से। यजुर्वेद संहिता के मंत्रों से बाबा का अभिषेक किया। सामवेद के मंत्रों से प्रार्थना की और अथर्वेद संहिता के मंत्रों से बाबा का आह्वान करते हुए काशी और मथुरा में मंदिर निर्माण के लिए आह्वान किया। 11 लाख रुद्राक्षों से यज्ञ की वेदी तैयार की गई है। 5454 त्रिशूल विश्व कल्याण के लिए स्थापित किए गए हैं।