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माघ मेला : काशी विश्वनाथ और मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण के लिए रुद्राक्ष महायज्ञ और दंडवत परिक्रमा शुरू

Thu, 25 Jan 2024 06:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बाल योगी ने बताया कि जौ विजय का प्रतीक होता है। उन्होंने इसी शिविर से राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था, जो पूरा हो गया है। अब वह काशी विश्वनाथ और मथुरा के लिए संकल्प ले चुके हैं। जल्द ही यहां भी मंदिर निर्माण होगा। 
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माघ मेले में बाल ब्रह्मचारी के शिविर में 11 लाख रुद्राक्ष से तैयार शिवलिंग। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अयोध्या में भव्य श्रीरामलला का मंदिर बनाने का संकल्प पूरा होने के बाद बाल ब्रह्मचारी स्वामी अभय चैतन्य फलाहारी मौनीजी महाराज ने काशी विश्वनाथ और मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण के लिए संकल्प ले लिया है। इसके लिए उन्होंने माघ मेले में स्थित अपने शिविर में रुद्राक्ष महायज्ञ और दंडवत परिक्रमा शुरू कर दी है। यहां पर 11 लाख रुद्राक्ष से शिवलिंग का निर्माण किया गया है। बृहस्पितवार से यह महायज्ञ शुरू किया गया। माघ मेला के सेक्टर तीन संगम नोज पर स्थित अपने शिविर में आयोजित महायज्ञ में जौ रोपकर यह संकल्प लिया गया।

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बाल योगी ने बताया कि जौ विजय का प्रतीक होता है। उन्होंने इसी शिविर से राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था, जो पूरा हो गया है। अब वह काशी विश्वनाथ और मथुरा के लिए संकल्प ले चुके हैं। जल्द ही यहां भी मंदिर निर्माण होगा। 

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विश्व कल्याण के लिए रखे गए त्रिशूल। - फोटो : अमर उजाला।
विश्व कल्याण के लिए रखे गए हैं 5454 त्रिशूल

अयोध्या में रामलला विराजमान के प्राण प्रतिष्ठा के लिए आमंत्रित किए गए महर्षि बाल योगी ने कहा कि आयोध्या में रामलला का दर्शन करने के बाद मन की जो स्थिति हुई वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। रामलला का दर्शन करने के बाद बोलने का सामर्थ्य समाप्त हो चुका था। नेत्र खुले ही रह गए और नेत्रों से जलधारा बह रही थी। यह दशा उनकी ही नहीं बल्कि वहां मौजूद सभी संतों की थी। मकर संक्रांति से शुरू होकर यह यज्ञ महाशिवरात्रि तक चलेगा। सवा करोड़ मंत्रों का जप होगा। इस वर्ष भी यह चल रहा है। यह 38वां वर्ष है। 

भूतभावन भगवान शिव का षोडशोपचार पूजन किया। ऋगवेद की संहिता के मंत्रों से। यजुर्वेद संहिता के मंत्रों से बाबा का अभिषेक किया। सामवेद के मंत्रों से प्रार्थना की और अथर्वेद संहिता के मंत्रों से बाबा का आह्वान करते हुए काशी और मथुरा में मंदिर निर्माण के लिए आह्वान किया। 11 लाख रुद्राक्षों से यज्ञ की वेदी तैयार की गई है। 5454 त्रिशूल विश्व कल्याण के लिए स्थापित किए गए हैं। 
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