हिंदी के चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि सामाजिक विज्ञान के अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन का कार्यक्रम 23 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। हिंदी एवं सामाजिक विज्ञान विषय के अभ्यर्थियों को अन्य विषयों के चयनित अभ्यर्थियों के मुकाबले देर से नियुक्ति मिलेगी। इसका असर उनके वेतन, इंक्रीमेंट और प्रमोशन पर भी पड़ेगा। यहां तक कि भविष्य में उनकी पेंशन भी इससे प्रभावित होगी।
हिंदी के चयनित अभ्यर्थी एक और विवाद में फंसे हुए हैं। आयोग ने अपने विज्ञापन में हिंदी के अभ्यर्थियों के लिए अर्हता निर्धारित की थी कि इंटर और बीए दोनों में संस्कृत विषय अनिवार्य होना चाहिए। वहीं, अभ्यर्थियों का कहना है कि अर्हता माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड निर्धारित करता है। चार मई 2016 को अर्हता में संशोधन किया गया था, जिसके तहत इंटर में संस्कृत और बीए में हिंदी विषय होना चाहिए या बीए में हिंदी और संस्कृत दोनों होना चाहिए।
तकरीबन 250 चयनित अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिनके पास इंटर में संस्कृत विषय नहीं था, लेकिन बीए में संस्कृत और हिंदी दोनों विषय था। इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंसने की आशंका है। बृहस्पतिवार को एलटी समर्थक मोर्चा के संयोजक विक्की खान के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने इस मसले पर आयोग के मीडिया प्रभारी पुष्कर श्रीवास्तव को ज्ञापन देकर अपनी बात रखी। मीडिया प्रभारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि यह मसला आयोग के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने अभ्यर्थियों को वार्ता के लिए 23 नवंबर को आयोग में बुलाया है।