चयन होने के बाद भी फंस गई नियुक्ति
आयोग ने वर्ष 2018 में ही चार से 14 जून तक पुन: आवेदन मांग लिए और जिन अभ्यर्थियों ने 29 अप्रैल 2018 को एकल विषय संस्कृत से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की, उन्होंने चार से 14 जून के बीच आवेदन किए। इनमें से 134 अभ्यर्थियों का चयन भी हो गया, लेकिन उनकी नियुक्ति फंस गई। विवाद शुरू हो गया कि 16 अप्रैल और 14 जून में से किसे आवेदन की अंतिम तिथि माना जाए। इसी विवाद में 134 चयनित अभ्यर्थियों की फाइलें आयोग में ही अटकी रही गईं, जबकि अन्य चयनितों की फाइलें माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को भेज दी गईं।
जिन अभ्यर्थियों की फाइलें आयोग में ही अटकी रह गईं, उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और उन्हें राहत भी मिल गई थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसके बाद भी आयोग ने उनकी फाइलें आगे नहीं बढ़ाईं हैं।
अभ्यर्थी मानकर चल रहे थे कि यूपी विधानसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद आयोग उनकी फाइलें निदेशालय को भेज देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चयनित अभ्यर्थी मनीष कुमार, ज्ञानलता, सुनील शुक्ला, पूर्णिमा, पंकज आदि ने आयोग से मांग की है कि उनकी फाइलें आगे बढ़ाईं जाएं, ताकि उन्हें नियुक्ति मिल सके।