ठेकेदारों ने लेबर सेस का नहीं किया भुगतान
हर निर्माण कार्य पर कुल लागत का एक फीसदी लेबर सेस लगता है। यह राशि श्रम विभाग को दी जाती है। यह राशि श्रमिकों के लिए शुरू योजनाओं पर खर्च की जाती है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इसकी वसूली निर्माण एजेंसियों से नहीं की गई। इससे श्रम विभाग को एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं चाचर नाला के मरम्मत कार्य में सेस के अलावा डेढ़ फीसदी वाटर चार्ज भी नहीं लिया गया। इससे भी चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
ऑडिट रिपोर्ट में प्रमुख आपत्तियां
नगर निगम
-एक दर्जन निर्माण कार्यों में टेंडर से 10 फीसदी अधिक भुगतान
-भोला का पुरवा में सड़क निर्माण में ठेकेदार से 6.19 लाख अर्थदंड नहीं लिया गया
-बेकार हो चुके सामानों को स्टोर में नहीं रखे जाने से 13.08 लाख से अधिक का नुकसान
-नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने गलत तरीके से दैनिक भोगी कर्मियों को 44 लाख का भुगतान किया-बिना मास्टर रोल के लिए एजेंसी को 2.41 करोड़ का भुगतान
जल संस्थान
-ओवरटाइम-त्योहारी भत्ता के नाम पर गलत तरीके से 1.02 करोड़ का भुगतान
-कर्मचारी होने के बावजूद नलकूप-टैंकर आदि संचालन का ठेके पर देकर गलत तरीके से 4.11 लाख का भुगतान
-काफी अधिक मूल्य पर बिजली उपकरणों की खरीद से 5.46 लाख का नुकसान
-बिना टेंडर 9.98 लाख रुपये के वर्दी, ब्लेजर आदि खरीदे गए
-वाहन होने के बावजूद निजी लिए गए और 6.31 लाख का भुगतान हुआ
कर वसूली में लापरवाही की बात ऑडिट के दौरान सामने आई थी। जवाब दिया गया है। यह नुकसान नहीं है। लोग टैक्स जमा नहीं करते हैं तो उनसे आगे वसूली की जाती है। सरकारी विभागों से भी 80 फीसदी तक जल एवं सीवर कर की वसूली की गई है। अन्य विभागों से आगे की जाएगी। सरकारी भवनों से कर वसूली की नीति है। इसी के अनुसार कर लिया जाता है। जांच के दौरान कई अन्य बिंदुओं पर भी आपत्ति उठाई गई थी। सभी का जवाब दिया गया है। - कुमार गौरव, जलकल
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ओर से ऑडिट रिपोर्ट को लेकर जानकारी नहीं है। रिपोर्ट में यदि किसी तरह की आपत्ति उठाई गई है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - चंद्र मोहन गर्ग, नगर आयुक्त