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प्रयागराज : जल, सीवर समेत अन्य कर वसूली में लापरवाही से 50 करोड़ से अधिक का नुकसान, CAG की रिपोर्ट से खुलासा

Thu, 10 Aug 2023 04:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ओर से नगर निकायों की ऑडिट रिपोर्ट मंगलवार को विधानमंडल में रखी गई। इसके अनुसार प्रयागराज नगर निगम में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 से 2016-2017 के बीच निगम तथा जलकल विभाग कर वसूली नहीं कर पाया।
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cag - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कर वसूली में अफसरों की लापरवाही से नगर निगम एवं जलकल को 50 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। सरकारी भवनों का ही जल एवं सीवर कर नहीं लिए जाने से विभाग को 2016-17 में 11 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं अलग-अलग कार्यों में अरबों रुपये की अनियमितता भी सामने आई है।

स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ओर से नगर निकायों की ऑडिट रिपोर्ट मंगलवार को विधानमंडल में रखी गई। इसके अनुसार प्रयागराज नगर निगम में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 से 2016-2017 के बीच निगम तथा जलकल विभाग कर वसूली नहीं कर पाया। इससे 50 करोड़ से अधिक नुकसान हुआ है।

जलकल विभाग सेवाकर भी नहीं वसूल पाया। रिपोर्ट के अनुसार 1.99 करोड़ के बजाय 37 लाख की ही वसूली कर सका। ऐसे में 1.61 करोड़ रुपये की क्षति हुई। रिपोर्ट के अनुसार शासन की अनुमति के बगैर एजेंसी ने अलग-अलग काम में गलत तरीके से श्रमिकों की नियुक्ति करने के नाम पर भुगतान प्राप्त कर लिया। इसमें 6.83 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता सामने आई है।

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इसी तरह से गलत तरीकेे से 2.41 करोड़ का भुगतान एक अन्य एजेंसी को भी किया गया है। 2016-17 में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने दैनिक भोगी कर्मचारियों को 44 लाख रुपये का अनियमित तरीके से भुगतान किया है। कई काम में एजेंसी को टेंडर से 10 फीसदी से अधिक का भुगतान कर दिया गया। इससे निगम को 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। सड़क, नाली, सीवर, नाला आदि के निर्माण में कई अन्य स्तर पर भी अनियमितता बरती गई, जिससे निगम को अरबों रुपये का नुकसान हुआ है।

ठेकेदारों ने लेबर सेस का नहीं किया भुगतान

हर निर्माण कार्य पर कुल लागत का एक फीसदी लेबर सेस लगता है। यह राशि श्रम विभाग को दी जाती है। यह राशि श्रमिकों के लिए शुरू योजनाओं पर खर्च की जाती है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इसकी वसूली निर्माण एजेंसियों से नहीं की गई। इससे श्रम विभाग को एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं चाचर नाला के मरम्मत कार्य में सेस के अलावा डेढ़ फीसदी वाटर चार्ज भी नहीं लिया गया। इससे भी चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। 

ऑडिट रिपोर्ट में प्रमुख आपत्तियां

नगर निगम

-एक दर्जन निर्माण कार्यों में टेंडर से 10 फीसदी अधिक भुगतान

-भोला का पुरवा में सड़क निर्माण में ठेकेदार से 6.19 लाख अर्थदंड नहीं लिया गया

-बेकार हो चुके सामानों को स्टोर में नहीं रखे जाने से 13.08 लाख से अधिक का नुकसान

-नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने गलत तरीके से दैनिक भोगी कर्मियों को 44 लाख का भुगतान किया-बिना मास्टर रोल के लिए एजेंसी को 2.41 करोड़ का भुगतान

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जल संस्थान

-ओवरटाइम-त्योहारी भत्ता के नाम पर गलत तरीके से 1.02 करोड़ का भुगतान

-कर्मचारी होने के बावजूद नलकूप-टैंकर आदि संचालन का ठेके पर देकर गलत तरीके से 4.11 लाख का भुगतान

-काफी अधिक मूल्य पर बिजली उपकरणों की खरीद से 5.46 लाख का नुकसान

-बिना टेंडर 9.98 लाख रुपये के वर्दी, ब्लेजर आदि खरीदे गए

-वाहन होने के बावजूद निजी लिए गए और 6.31 लाख का भुगतान हुआ
 

कर वसूली में लापरवाही की बात ऑडिट के दौरान सामने आई थी। जवाब दिया गया है। यह नुकसान नहीं है। लोग टैक्स जमा नहीं करते हैं तो उनसे आगे वसूली की जाती है। सरकारी विभागों से भी 80 फीसदी तक जल एवं सीवर कर की वसूली की गई है। अन्य विभागों से आगे की जाएगी। सरकारी भवनों से कर वसूली की नीति है। इसी के अनुसार कर लिया जाता है। जांच के दौरान कई अन्य बिंदुओं पर भी आपत्ति उठाई गई थी। सभी का जवाब दिया गया है। - कुमार गौरव, जलकल
 

स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ओर से ऑडिट रिपोर्ट को लेकर जानकारी नहीं है। रिपोर्ट में यदि किसी तरह की आपत्ति उठाई गई है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - चंद्र मोहन गर्ग, नगर आयुक्त

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