चुनाव के दौरान शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस की ओर से तमाम कार्रवाई की जाती है। इनमें निरोधात्मक कार्रवाई के साथ ही एक बड़ा काम लाइसेंसी शस्त्रों को जमा कराने का होता है। वर्तमान में लाइसेंसी शस्त्राें के भौतिक सत्यापन का काम चल रहा है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूं तो प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस को कई चुनौतियों से जूझना होगा। हालांकि, सबसे बड़ा काम 30 दिन में लगभग 30 हजार लाइसेंसी असलहों को जमा कराने का होगा। आचार संहिता लगने के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इनको जमा कराना होगा।
चुनाव के दौरान शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस की ओर से तमाम कार्रवाई की जाती है। इनमें निरोधात्मक कार्रवाई के साथ ही एक बड़ा काम लाइसेंसी शस्त्रों को जमा कराने का होता है। वर्तमान में लाइसेंसी शस्त्राें के भौतिक सत्यापन का काम चल रहा है। पुलिस विभाग की ओर से अपने और जिला प्रशासन के रिकॉर्ड का मिलान कराकर सूची अपडेट की जा रही है।
चुनाव आचार संहिता लगने के बाद शस्त्र लाइसेंस जमा कराने का काम शुरू होगा। जनपद में लगभग 36 हजार लाइसेंसी शस्त्रधारक हैं। इनमें से 10 प्रतिशत भी आवश्यक सेवाओं जैसे सुरक्षा गार्ड, जान को गंभीर खतरा आदि में प्रयुक्त मान लिए जाएं तो 32 हजार लाइसेंसी शस्त्र जमा कराने होंगे।
उधर, जानकारों का कहना है कि पिछले दो चुनावों में कुल सात चरणों में लोकसभा चुनाव संपन्न कराए गए। इनमें से प्रयागराज में पांचवें चरण में मतदान कराया गया। आचार संहिता लगने के बाद आमतौर पर नामांकन आदि की प्रक्रिया में एक महीने का वक्त मिलता है। ऐसे में पुलिस के पास लाइसेंसी शस्त्र जमा कराने के लिए बमुश्किल एक महीने का समय होगा। एडीसीपी अपराध सतीश चंद्र का कहना है कि चुनाव संंबंधी सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएंगी।
पुलिसकर्मियों का पांच गुना लाइसेंसी शस्त्रधारक
लाइसेंसी शस्त्रधारकों की बात की जाए तो इनकी संख्या जिले में कुल पुलिसकर्मियों की संख्या का लगभग पांच गुना ज्यादा है। जनपद में कुल पुलिसबल सात हजार के आसपास है जबकि लाइसेंसी शस्त्रधारकों की संख्या 36 हजार के आसपास है।