डीआईजी जेल ने बताया कि इस प्रकरण में जेलर, डिप्टी जेलर व सुपरिटेंडेंट की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। प्रथम दृष्टया फोटो जेल के भीतर की लग रही है। जांच रिपोर्ट तैयार करके एवं सभी अधिकारियों के दायित्व तय करके रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी गई है। जेल के अंदर फोटो किस उपकरण से खींची गई, इस बारे में डीआईजी वीआर वर्मा का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फोटो किसने और किससे खींची है। साथ में उन बंदियों का भी नहीं पता चला है जिनके हाथ व पैर उस फोटो में दिख रहे हैं। दीवार के रंग और फर्श के बारे में डीआईजी ने बताया कि प्रबल संभावना है कि दीवार की पोताई करा दी गई हो। एडीजी जेल चंद्र प्रकाश ने छह जून की देर शाम इस प्रकरण में वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह, जेल अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा, उप जेल अधीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
जेल के अंदर दारू मुर्गा की वायरल फोटो की जांच के बाद डीआईजी जेल ने इस प्रकरण में फोटो में दिख रहे चारों बंदियों के अलावा दोनों निलंबित कर्मचारियों मूलचंद्र दोहरे व कृष्ण कुमार, डिप्टी जेलर आशुतोष मिश्रा व शिवसरन, जेलर राजीव कुमार मिश्रा, वीरेंद्र कुमार त्रिवेदी, रायटर अमरदीप के साथ वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह का भी लिखित बयान लिया। हालांकि सभी अधिकारियों एवं फोटो में दिख रहे अपराधियों ने वायरल फोटो को वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद फाफामऊ के शास्त्री नगर स्थित पूर्व पार्षद पति रामकुमार के घर की बताया है।
केंद्रीय कारागार के भीतर शराब-मुर्गा पार्टी की वायरल फोटो पर डीआईजी जेल बीआर वर्मा की जांच रिपोर्ट के बाद भी कई सवाल बाकी हैं। उधर, इस प्रकरण को लेकर जेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों में आक्रोश भी है। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों व अफसरों का कहना है कि वायरल फोटो के बैकग्राउंड में दिख रही दीवार और फर्श, बैरक तीन के हालात से बिल्कुल जुदा हैं, जहां पर पार्टी होना दिखाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, जेल की बैरक की दीवारों की पोताई कम से कम छह महीने से नहीं हुई, ऐसे में उसका रंग तीन महीने में कैसे बदल गया, यह भी बड़ा सवाल है। उधर, पांच जून तक डीआईजी खुद यह कह रहे थे कि दीवार का रंग और फर्श जेल की बैरक से मैच नहीं कर रहे और छह जून को कहने लगे कि उन दीवारों को पोत दिया गया है। इसको लेकर वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह का कहना है कि वह कल भी कह रहे थे कि यह फोटो बाहर की और आज भी कह रहे हैं। इसके पीछे गहरी साजिश है। जिसकी उच्चस्तरीय जांच अनिवार्य है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक के अनुसार फोटो फर्जी है। यह नैनी जेल की है ही नहीं, फिर भी नैनी जेल की बताकर वायरल करना सीधे-सीधे कारागार और यहां के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बदनाम करना है।
पूर्व पार्षद पति रामकुमार यादव, उदय सिंह यादव, संजय यादव और रानू जेल से बाहर रहने के दौरान अलग-अलग गिरोह के होते हुए एक साथ कैसे इस तरह की पार्टी मना सकते हैं, का जवाब गुरुवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने ही दे दिया। उन्होंने बताया कि पूर्व पार्षद पति रामकुमार यादव के बड़े भाई का उदय सिंह यादव साला है। इस हिसाब से उन दोनों का साले बहनोई का रिश्ता है। उदय सिंह का संजय यादव रिश्तेदार है, जबकि रानू उदय का मित्र है। ये जेल में आने से पहले ही एक साथ थे।
नैनी। वायरल फोटो को लेकर हंगामा होने के बाद अब जेल प्रशासन फोटो में दिख रहे चारों अपराधियों पूर्व पार्षद पति रामकुमार यादव, उदय यादव, संजय यादव, रानू और कुख्यात अपराधी गदऊ पासी की जेल ट्रांसफर होना तय हो गया है। जेल प्रशासन की ओर से इन पांचों अपराधियों को दूसरे जेल में भेजने के लिए अपने शीर्ष अधिकारियों को लिखा जाएगा।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर व डिप्टी जेलर पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति डीआईजी की ओर से प्रेषित रिपोर्ट में की गई है। हेडवार्डर व वार्डर को निलंबित कर दिया गया है। अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सफाई मिलने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
चंद्र प्रकाश
एडीजी जेल, उत्तर प्रदेश।