आजमगढ़ के सरायमीर का फौजदार पासवान हत्याकांड
प्रयागराज। स्पेशलकोर्ट एमपीएमएलए इलाहाबाद ने बसपा सरकार में मद्य निषेध मंत्री रहेे हीरालाल गौतम को हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई है। हीरालाल को सपा नेता हेमराज के भाई फौजदार पासवान की गोली मार कर हत्या करने का दोषी पाया गया है। हीरालाल के साथ ही अदालत ने दो अन्य अभियुक्तों शिवकुमार और इंद्रभान को भी हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। हीरालाल गौतम को अदालत ने 17 जनवरी को दोषी करार दिया था। इसके बाद उनके सहित तीनों अभियुक्तों को नैनी जेल भेज दिया गया था। सजा सुनाने के बाद अदालत ने सभी अभियुक्तों को सजा काटने के लिए आजमगढ़ जिला कारागार भेजने का निर्देश दिया है।
अदालत ने पूर्व मंत्री उम्रकैद के अलावा 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है जबकि शिवकुमार और इंद्रभान पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगा है। स्पेशलकोर्ट जज डा. बालमुकुंद ने इस मामले के चौथे आरोपी रोशनलाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने जुर्माने की धनराशि में से 90 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी और बच्चों को देने का आदेश दिया है। अभियोजन की ओर से एसपीओ जय गोविंद उपाध्याय, विशेष लोक अभियोजक वीरेन्द्र सिंह गोपाल जी,एडीजीसी राजेश गुप्ता और वादी के अधिवक्ता अविनाश चन्द्र पांडेय ने अभियुक्तों के विरुद्ध साक्ष्य पेश किए।
चुनावी रंजिश में हुई हत्या
फौजदार पासवान की हत्या चुनावी रंजिश के चलते हुई थी। फौजदार आजमगढ़ में रसूख रखने वाले सपा नेता हेमराज पासवान के भाई थे। वह खुद भी वीडीसी सदस्य थे। इसी रंजिश के चलते 27 नवंबर 2010 को वह सुबह दस बजे अपने गांव कमलापुर स्थित घर से सरायमीर बाजार बाइक से जा रहे थे। लालता प्रसाद बाइक चला रहे थे जबकि फौजदार सिंह और महेंद्र पीछे बैठे थे। जैसे ही तीनों इसरौली बस्ती के पास पहुंचे उसी समय पीछे से एक बाइक से जिसे हीरालाल गौतम चला रहे थे जिस पर गांव के शिवकुमार तथा एक अन्य व्यक्ति बैठे थे, ओवरटेक करके उसकी गाड़ी आगे आकर रोक लिया। हीरालाल ने ललकारा की ‘फौजदरवा के राजनीतिक उन्माद को मिटा दो’। जिस पर शिवकुमार आदि ने अपने अपने असलहे से फायर कर फौजदार को गोली मार दी । गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना चुनावी रंजिश को लेकर हुई थी। अभियोजन ने आरोप साबित करने के लिए आठ गवाह पेश किए है।
विवेचना में हटा दिया था पूर्व मंत्री का नाम
हत्याकांड की विवेचना में जांच अधिकारी ने हीरालाल गौतम का नाम हटा दिया गया था। इसके खिलाफ वादी ने कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट के आदेश पर हीरालाल के खिलाफ विचारण शुरू हुआ और अंतत: उनको हत्या का दोषी पाया गया।
कोर्ट ने अभियुक्त शिवकुमार और इंद्रभान उर्फ इंदू को आर्म्स एक्ट की धारा 27 एक में आरोप साबित होने पर सात सात साल की कैद और दो दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा भी सुनाई है। पुलिस ने विवेचना के दौरान आला कत्ल तंमचा बरामद किया था।