इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित नकली लॉ डिग्री के मामले में अधिवक्ता गौरव ब्रजवासी को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की अदालत ने कहा कि केवल विश्वविद्यालय से डिग्री का बिना सत्यापन के वापस आ जाना, शुरुआती स्तर पर यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि दस्तावेज जाली है।
मामला सिविल लाइंस थाने में दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के अपराधों से संबंधित है। आवेदक की लॉ डिग्री प्रैक्टिस सर्टिफिकेट के नवीनीकरण के दौरान सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजी गई थी। उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के अनुसार, डिग्री बिना सत्यापन के वापस आ गई। इसके बाद हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के तहत एफआईआर दर्ज की गई। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अदालत ने कहा कि संबंधित विश्वविद्यालय की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है कि डिग्री जाली थी अथवा सत्यापन क्यों नहीं हो सका। जांच जारी है और कथित अपराध दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं दिखती।
आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने समेत अन्य शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया।