गन्ना किसानोें को उनको बकाया भुगतान कराने में हाईकोर्ट की सख्ती काम आई। सत्र 2013-14 के 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक बकाया भुगतान में से अब मात्र 177.6 करोड़ रुपये की धनराशि ही शेष रह गई है। हाईकोर्ट ने बची हुई धनराशि का भुगतान करने के लिए मिलों को एक और मौका दिया है। मिलों को 30 अप्रैल और 18 मई तक दो किस्तों में बची हुई रकम देने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद अदालत स्वयं मिलों पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता की खंडपीठ ने मवाना सुगर मिल को 30 अप्रैल तक 30 करोड़ रुपये और 18 मई से पहले 50 करोड़ रुपये के भुगतान का निर्देश दिया है। मवाना पर 133.7 करोड़ रुपये बकाया हैं। याची वीएम सिंह ने पीठ को बताया कि मोदी सुगर मिल मलिकपुर ने 88 में से 44 करोड़ रुपये दे दिए हैं इसमें 31 करोड़ का भुगतान और 13 करोड़ का पोस्ट डेटेड चेक शामिल है। शेष 44 करोड़ में से 20 करोड़ रुपये 30 अप्रैल तक और 24 करोड़ रुपये 18 मई तक भुगतान करना है। पीठ ने कहा है कि यदि भुगतान में लापरवाही की जाती है तो सरकार दंडात्मक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है अन्यथा अदालत स्वयं अवमानना की कार्रवाई करेगी।
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने गन्ना आयुक्त को अगली तारीख पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सत्र 2014-15 की पेराई का पूरा हिसाब देने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कहा कि हर मिल ने कितना गन्ना पेरा, कितनी चीनी का उत्पादन किया, कितनी चीनी बेची और कितना किसानों को भुगतान किया गया इसका रिकार्ड कोर्ट को दिया जाए। इससे पूर्व वीएम सिंह ने कोर्ट को बताया कि पूरे प्रदेश मेें अब तक 300 किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं। स्थिति काफी भयावह है इसलिए किसानों का हित देखना जरूरी है। याचिका पर अगली सुनवाई 19 मई को होगी।