सांस्कृतिक केंद्र में शनिवार को शरद चंद्र चट्टोपाध्याय कृत ‘परिणिता’ का मंचन सफलता श्रीवास्तव के निर्देशन में किया गया। आलोक नायर द्वारा नाट्य रूपांतरित उपन्यास ‘परिणिता’ में ललिता के रूप में उन किशोरियों की वेदना को दिखाया गया। भारतीय नारी अपने पति के प्रति प्रेमाकुल होते हुए भी अपने चरित्र और स्वाभिमान पर जरा भी आंच नहीं आने देती, भले ही उनको घुटकर जीना पड़े।
नाटक में दिखाया गया कि बचपन में मां-बाप के देहांत हो जाने की वजह से ललिता अपने मामा-मामी के साथ रहती है। मामा को अपनी पांच बेटियां के साथ उसकी शादी की भी चिंता है। पड़ोस में रहने वाले मामा के मित्र नवीन चंद्र के छोटे बेटे शेखर के साथ बचपन से ही ललिता पढ़ी लिखी थी। दोनों का साथ और देखभाल कब प्रेम में तबदील हो गया, दोनों को पता नहीं चला। दोनों को इस बात का तब अहसास हुआ जब पड़ोस में रहने वाली मनोरमा का भाई गिरींद्र, ललिता के जीवन में आया। तब ललिता और शेखर ने आपस में माला पहनाकर प्रणय स्थापित किया, लेकिन पारिवारिक और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते दोनों ने अपने प्रेम को दूसरों के सामने स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद गिरींद्र और ललिता के शादी का प्रस्ताव बन गया, लेकिन गिरीन्द्र को समय रहते ही आभास हुआ और उसने शादी नहीं की और शेखर को सारी बातें बता दीं। तब शेखर ने सारी सच्चाई जानते हुए ललिता से विवाह किया और उसको घर ले आया। कलाकार अजॉय चक्रवर्ती, अजय मुखर्जी, आकाश अग्रवाल, मुकेश उपाध्याय, ममता श्रीवास्तव, ओशीन सिंह, कोमल पांडेय, सफलता श्रीवास्तव, प्रदीप चौहान, चंकी बच्चन के अभिनय को पसंद किया गया। प्रकाश सुजॉय घोष, प्रस्तुति नियंत्रक जतिन कुमार, रूप सज्जा संजय चौधरी का रहा।