ललित वर्मा हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई टीम ने बुधवार को चचेरे भाई विक्रम से लंबी पूछताछ की। विक्रम घटना के वक्त ललित के साथ था। सीबीआई टीम ने विक्रम से लंबी पूछताछ कर कहा है कि वह फिलहाल शहर न छोड़े। विक्रम की पुरानी कॉल डीटेल्स निकलवाई जा रही है। उसने बयान की अन्य लगों से पुष्टि की जाएगी।
सीबीआई टीम ने मंगलवार को ललित के घर वालों से हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की थी। ललित के पिता विनोद कुमार को सिविल लाइंस में घटनास्थल के पास भी ले जाया गया था। वहां पर घटना वाले दिन क्या क्या हुआ, उसके बारे में पूछताछ की गई थी। उनकी लोकेशन, हत्यारों की गाड़ी और अन्य बातों के बारे में विनोद से जानकारी ली गई थी।
पहली एफआईआर में विनोद वादी तो हैं हीं, मुख्य गवाह भी थे। बुधवार को पुलिस ने ललित के चचेरे भाई विक्रम से पूछताछ की। घटना वाले दिन ललित विक्रम के साथ ही बाइक पर बैठकर जा रहा था। सीबीआई ने विक्रम से घटना वाले दिन की एक एक बात की पूछताछ की। वह कितने बजे विक्रम के पास पहुंचा था? दोनों कितने बजे सिविल लाइंस के लिए ? यहां उन्हें क्या काम था? इन सब बातों के बारे में सीबीआई ने उससे घंटों पूछताछ की।
विक्रम के बयान को विनोद के बयान से मिलाया भी जाएगा। इसके अलावा भी जिन लोगों के बयान लिए जाएंगे, उन सबसे विक्रम के बयान का मिलान कराया जाएगा। विक्रम के पुरानी सीडीआर भी मंगाई गई है। हत्याकांड के खुलासे में विक्रम सबसे अहम कड़ी साबित हो सकता है, क्योंकि घटना के वक्त वह ललित के साथ था। धूमनगंज के जयंतीपुर निवासी ललित वर्मा की हत्या फरवरी 2016 में सिविल लाइंस में हुई थी।
इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने पूर्व विधायक पूजा पाल, राजेश त्रिपाठी, संदीप यादव, पूजा के भाई राहुल पाल, दिलीप पाल, मुकेश केसरवानी और पृथ्वी पाल पर मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अपनी जांच में पूजा समेत सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी।
क्लीन चिट के विरोध में परिजनों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने नवंबर 2017 में प्रदेश सरकार को मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की।