प्रो. धर ने इविवि को दान कर दी थी अपनी संपत्ति
इविवि में प्रो. नील रतन धर जैसे शिक्षक भी रहे, जिन्होंने न सिर्फ दुनिया भर में रसायन विज्ञान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया, बल्कि विश्वविद्यालय और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी संपत्ति भी दान कर दी। उन्हीं की दान की गई जमीन पर शीलाधर इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई थी। प्रो. धर ने प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता से एमएससी की उपाधि प्राप्त की और छात्र जीवन में ही देश के दो महान वैज्ञानिकों प्रो. पीसी रे और प्रो. जेसी बोस के संपर्क में आए। दोनों ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। प्रो. धर के 600 से अधिक शोध पत्र देश-विदेश में प्रकाशित हुए और उनके निर्देशन में 150 छात्रों ने डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। प्रो. पीसी रे और डॉ. शांति स्वरूप भटनागर जैसे वैज्ञानिकों ने कई बार सार्वजनिक रूप से प्रो. धर को ‘फादर ऑफ इंडियन फिजिकल केमेस्ट्री’ कहकर संबोधित किया।
नोबल पुरस्कार चयन समिति में शामिल रहे प्रो. बावा करतार सिंह
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भारत के बिरले सिख वैज्ञानिक प्रो. बावा करतार सिंह जैसे शिक्षक भी रहे, जिनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों से प्रभावित होकर नोबल समिति ने उन्हें नोबल पुरस्कार के लिए रसायनविदों को नामित करने का सम्मान दिया। प्रो. बावा ने पहली बार रैकमिक मिक्सचर और रैकमिक कंपाउंड को पहचानने के लिए बायोकेमेकिल तकनीक विकसित की। प्रो. बावा ‘गुरुग्रंथ साहब’ और अन्य सिख धार्मिक ग्रंथों के गहन अध्येता के रूप में विख्यात थे। इसी वजह से उन्हें सिख धर्म की पांच सर्वोच्च पीठों में से एक गुरु गोविंद सिंह जी के जन्म स्थान पटना साहिब के ‘तख्त हरमंदर साहब’ की प्रबंध समिति का अध्यक्ष भी चुना गया था।