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शिक्षक दिवस पर विशेष : एक गुरुजी ऐसे भी हैं, जो एक रुपये में दे रहे शिक्षा, दो बच्चे आईआरटी से कर रहे बी.टेक

Thu, 05 Sep 2024 02:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अलोपीबाग के पास 2022 से अभिषेक अपने दोस्तों संग मिलकर स्कूल खोलकर प्ले ग्रुप से एक तक के बच्चों को कॉन्वेंट की जैसी शिक्षा दे रहे हैं। फीस के रूप में इनसे मात्र एक रुपये प्रतिदिन लेते हैं। हालांकि, कुछ अभिभावक वह भी नहीं दे पाते। ऐसे में ये अपने दोस्तों और 20 स्वयंसेवक से मदद लेते हैं। ताकि, बच्चों को कॉपी-किताब और ड्रेस दे सकें।
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शिक्षक दिवस। सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संगमनगरी में एक गुरुजी ऐसे भी हैं, जो प्रतिदिन एक रुपये में तीन साल से सुबह मलिन बस्ती के बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। वहीं, चार साल से शाम को अन्य बच्चों को फ्री में कोचिंग भी पढ़ाते हैं। अब तो इनके कोचिंग पढ़ाए दो बच्चे आईआरटी से बीटेक भी कर रहे हैं। जबकि, इनके अभिभावक आर्थिक रूप से इतने कमजोर थे कि पांचवीं तक इन्हें पढ़ा पाने के बारे में नहीं सोचे थे। हम बात कर रहे हैं सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले फूलपुर के अभिषेक शुक्ला की।

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अलोपीबाग के पास 2022 से अभिषेक अपने दोस्तों संग मिलकर स्कूल खोलकर प्ले ग्रुप से एक तक के बच्चों को कॉन्वेंट की जैसी शिक्षा दे रहे हैं। फीस के रूप में इनसे मात्र एक रुपये प्रतिदिन लेते हैं। हालांकि, कुछ अभिभावक वह भी नहीं दे पाते। ऐसे में ये अपने दोस्तों और 20 स्वयंसेवक से मदद लेते हैं। ताकि, बच्चों को कॉपी-किताब और ड्रेस दे सकें।

स्कूल में सुबह साढ़े सात से 10:30 बजे तक क्लासेस चलती हैं। इनमें 60 बच्चे पढ़ते हैं। यहां पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद व अन्य गतिविधि भी कराते हैं। वहीं, इनकी टीम शाम पांच बजे बस्ती में अन्य बच्चों को कोचिंग भी पढ़ाती है। इनकी कोचिंग से पढ़े दो बच्चे करन और धीरज आईआरटी से बीटेक कर रहे हैं। कोचिंग में करीब 70 बच्चे पढ़ने आते हैं।

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स्कूल की दीवारों के जरिये पढ़ाते हैं छोटा अ और बड़ा आ

स्कूल की दीवारों पर स्लोगन के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया जाता है। भिक्षा नहीं शिक्षा चाहिए...दीवारों पर ए बी सी डी... वन टू थ्री लिखा है। ये बच्चे उस तबके से आते हैं, जिनके माता-पिता ठेला, खुमचा, सब्जी बेचते हैं। इनके पास इतना पैसा नहीं है और न ही जागरूक हैं। ऐसे ही बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। स्कूल में शालिनी यादव, सिमरन, श्रेया श्रीवास्तव, खुशबू बानो, शबा बच्चों को पढ़ाती हैं। ये खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। इनका कहना है कि इस कार्य से उन्हें जो सुकून मिलता है, उसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।
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