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मकर संक्रांति के दिन संगम पर उमड़ा जनसैलाब, 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Tue, 15 Jan 2019 06:45 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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मकर संक्रांति के प्रथम स्नान महापर्व पर मंगलवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर देश-दुनिया के हर कोने से आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रयागराज की सड़कें चहुंदिश श्रद्धा पथ में तब्दील हो गईं। देश-दुनिया भर से संतों, श्रद्धालुओं, पर्यटकों का सागर उमड़ा तो 5.50 किमी लंबे संगम तट पर कहीं तिल रखने भर की जगह नहीं बची। जय श्री राम के गगनभेदी जयघोष के बीच कोई हाथों में ध्वज लिए संगम की ओर दौड़ता रहा तो कोई दंड-कमंडल, मनका लिए हुए लपकते पांवों से बढ़ता रहा।

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कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार शाम 6 बजे तक एक करोड़ 26 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में डुबकी लगाई थी। शाम 8 बजे तक डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 1.5 करोड़ को पार कर गई। वहीं मेला प्रशासन ने बताया कि सोमवार को करीब 56 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई थी। यानि अब तक संगम में 2 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। इसी के साथ विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक-धार्मिक समागम के रूप में दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ का आगाज हो गया। 

संगम तट पर मकर स्नान के लिए गंगा-यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं का खचाखच जमावड़ा सोमवार रात 12 बजे से ही शुरू हो गया था। भीड़ प्रबंधन के चलते तीन किमी पहले ही वाहनों को रोक दिए जाने की वजह से सड़कें हर तरफ पैदल पथ में तब्दील हो गईं। सिर पर गठरी, कंधे पर झोला हाथों में बच्चों और महिलाओ अपनों का हाथ थामे लोग संगम तट की ओर लंबे डग भरते रहे। फाफामऊ से अरैल के बीच संगम के लंबे दोनों तटों पर बने 35 स्नान घाटों पर दो बजे रात से ही डुबकी लगनी शुरू हो गई। संगम तट की रेती पर बिछे पुआलों पर दूर-दराज से आए लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहले से स्नान की प्रतीक्षा करते-करते सो गए थे। हर हर महादेव के जयकारों के साथ स्नान शुरू होते ही धक्कामुक्की शुरू हो गई।

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35 घाटों पर अरैल से फाफामऊ के बीच लगी पुण्य की डुबकी

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एक पर एक लोग चढ़ते, गिरते, संभलते त्रिवेणी की पावन धारा में पुण्य की झमाझम डुबकी लगाने लगे। अपनों से बिछड़ने, कपड़े, सामान खोने का सिलसिला शुरू हो गया। पुलिस, पैरामिलिट्री के अलावा होमगार्ड, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस और यूपी एसटीएफ के जवान लाउडस्पीकर के साथ असंख्य श्रद्धालुओं को सहेजने और उनकी मदद करने में जुट गए। जगह-जगह समूहों में महिलाएं गंगा मैया और तीर्थराज की महिमा का गान करती नजर आईं। स्नान के साथ ही दीपदान भी शुरू हो गया।

पौ फटने से पहले संगम तट तक जाने में कड़ाके की सर्दी के बीच लोगों को पसीना छूटने लगा। नैनी, झूंसी, बदरा सोनौटी, शिवकुटी, नागवासुकि समेत अन्य स्नान घाटों पर जहां तक नजर जाए सिर्फ श्रद्धालुओं के सिर ही सिर नजर आ रहे थे। सुबह 10 बजे तक जहां 69 लाख भक्तों ने संगम में डुबकी लगाई थी, वहीं दोपहर 1 बजे अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार 1.07 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का दावा किया। इसके बाद भी संगम पर पहुंचने का न तो रेला टूटा न लय कमजोर पड़ी। जन सैलाब उमडऩे से संगम जाने वाले कुंभ मेला क्षेत्र के सभी 20 सेक्टरों के चकर्ड प्लेट मार्ग भीड़ से पैक रहे। 
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मकर संक्रांति पर मंगलवार की भोर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं, संतों और अतिथियों के लिए किसी निधि के मानिंद नजर आई। स्नान के बाद दूर दराज के इलाकों से आए लोगों ने बच्चों, महिलाओं के हाथों दीपदान कराया। लोग स्नान करते और संगम की लहरों पर दीप जलाते जा रहे थे। इससे बैरीकेडिंग के बीच गंगा-यमुना की लहरों पर एक तारामंडल इतराता नजर आने लगा। सुबह की पहली सुनहरी ताम्रमई रेखा गंगा की धारा पर खिंचने लगी तो उस सुहावने, लुभावने और मनोरम दृश्य को कैमरे में कैद करने की होड़ सी मच गई। इटली से आई क्रिस्टीना संगम तट पर उगते सूरज को कैमरे में कैद करने की कोशिश में फिसल गईं। 

भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी के सुरमई भजनों से हुई संगम पर सुबह 
मकर संक्रांति के स्नान पर्व की सुबह शास्त्रीय संगीत के महान साधक भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी के भजनों से हुई। राग भैरवी में निबद्ध उनके भजन के बोल - भजु मन राम चरन सुखदाई... हर मन की थकान हरने के लिए काफी थे। कहीं डमरू नाद गूंज रहा था तो कहीं शंखध्वनि तो कहीं वेद की ऋचाओं का सस्वर गान संगम की पावन धरती के हर कण में उल्लास पैदा कर रहा था।  
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