एक पर एक लोग चढ़ते, गिरते, संभलते त्रिवेणी की पावन धारा में पुण्य की झमाझम डुबकी लगाने लगे। अपनों से बिछड़ने, कपड़े, सामान खोने का सिलसिला शुरू हो गया। पुलिस, पैरामिलिट्री के अलावा होमगार्ड, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस और यूपी एसटीएफ के जवान लाउडस्पीकर के साथ असंख्य श्रद्धालुओं को सहेजने और उनकी मदद करने में जुट गए। जगह-जगह समूहों में महिलाएं गंगा मैया और तीर्थराज की महिमा का गान करती नजर आईं। स्नान के साथ ही दीपदान भी शुरू हो गया।
पौ फटने से पहले संगम तट तक जाने में कड़ाके की सर्दी के बीच लोगों को पसीना छूटने लगा। नैनी, झूंसी, बदरा सोनौटी, शिवकुटी, नागवासुकि समेत अन्य स्नान घाटों पर जहां तक नजर जाए सिर्फ श्रद्धालुओं के सिर ही सिर नजर आ रहे थे। सुबह 10 बजे तक जहां 69 लाख भक्तों ने संगम में डुबकी लगाई थी, वहीं दोपहर 1 बजे अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार 1.07 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का दावा किया। इसके बाद भी संगम पर पहुंचने का न तो रेला टूटा न लय कमजोर पड़ी। जन सैलाब उमडऩे से संगम जाने वाले कुंभ मेला क्षेत्र के सभी 20 सेक्टरों के चकर्ड प्लेट मार्ग भीड़ से पैक रहे।
मकर संक्रांति पर मंगलवार की भोर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं, संतों और अतिथियों के लिए किसी निधि के मानिंद नजर आई। स्नान के बाद दूर दराज के इलाकों से आए लोगों ने बच्चों, महिलाओं के हाथों दीपदान कराया। लोग स्नान करते और संगम की लहरों पर दीप जलाते जा रहे थे। इससे बैरीकेडिंग के बीच गंगा-यमुना की लहरों पर एक तारामंडल इतराता नजर आने लगा। सुबह की पहली सुनहरी ताम्रमई रेखा गंगा की धारा पर खिंचने लगी तो उस सुहावने, लुभावने और मनोरम दृश्य को कैमरे में कैद करने की होड़ सी मच गई। इटली से आई क्रिस्टीना संगम तट पर उगते सूरज को कैमरे में कैद करने की कोशिश में फिसल गईं।
भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी के सुरमई भजनों से हुई संगम पर सुबह
मकर संक्रांति के स्नान पर्व की सुबह शास्त्रीय संगीत के महान साधक भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी के भजनों से हुई। राग भैरवी में निबद्ध उनके भजन के बोल - भजु मन राम चरन सुखदाई... हर मन की थकान हरने के लिए काफी थे। कहीं डमरू नाद गूंज रहा था तो कहीं शंखध्वनि तो कहीं वेद की ऋचाओं का सस्वर गान संगम की पावन धरती के हर कण में उल्लास पैदा कर रहा था।