कुंभ क्षेत्र में होने वाली धर्मसंसद में इस बार संतों की तरफ से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तारीख घोषित कर दी जाएगी। यह फैसला विश्व हिंदू परिषद की दो दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक में लिया जा चुका है। विहिप के केंद्रीय पदाधिकारियों के कोर टीम की बैठक में इस बात पर भी मंथन हुआ है कि धर्म संसद में संत मोदी और योगी सरकार को लेकर अपना रुख ठीक रखें। जिससे माहौल राम मंदिर निर्माण के पक्ष में रहे।
यह भी पता चला है कि धर्म संसद में आने के लिए संतों को दिए जा रहे निमंत्रण पत्र के साथ उनसे आने का आग्रह तो किया ही जा रहा है, साथ में यह भी विनती की जा रही है कि वे धर्म संसद में सरकार के पक्ष को लेकर संयमित रहे। विहिप को इस बात का डर है कि यदि संत मंदिर निर्माण में हो रही देरी के मामले में क्रोधित हो गए और सरकार को दोषी ठहराने लगे तो उनका मूल एजेंडा बेकार हो जाएगा। यही वजह है कि संतों को इस बात की भी जानकारी दी जा रही है कि धर्म संसद में मंदिर निर्माण की तारीख घोषित करने का फैसला लिया गया है।
बताया जा रहा है कि बैठक में यह भी चर्चा हुई है कि केंद्र सरकार मंदिर निर्माण को लेकर अध्यादेश लाने के पक्ष में नही है। रणनीति यह है कि संतों और देश की जनता में मंदिर निर्माण को लेकर जो उत्साह है उसे और बढ़ाकर जन आंदोलन का रूप दिया जाए। जैसे पूर्व में विवादित ढांचा ढहा दिया गया था, उसी तरह से मंदिर का निर्माण भी करा दिया जाए। इससे माहौल भी भाजपा के पक्ष जाएगा। जिसका लाभ आगामी लोकसभा चुनाव में मिल सकता है।
मंदिर निर्माण की तिथि घोषित करने के संबंध में विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि इसके लिए एक फरवरी का इंतजार करना होगा। यह काम संतों के जरिए किया जाना है। एक फरवरी को ही धर्म संसद मेें पारित होने वाले कई और प्रस्तावों की घोषणा होगी।