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कुमार विश्वास ने बांधा समां : अपने चिर परिचित अंदाज में कुमार विश्वास ने लोगों को झूमने पर किया विवश

Sat, 27 Jan 2024 04:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जाने माने कवि कुमार विश्वास ने गाया- मैं अपनी गीत गजलों से उसे पैगाम करता हूं, उसी की दी हुई दौलत उसके नाम करता हूं। हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना, वो अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूं। किसी के दिल की मायूसी जहां से हो के गुजरी है, कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है।
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इफको फूलपुर में आयोजित कवि सम्मेलन में प्रस्तुति देते कवि कुमार विश्वास। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इफको फूलपुर इकाई में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास के साथ ही कवि रमेश मुस्कान, सुदीप भोला, दिनेश बावरा व कृति चौबे ने अपनी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से महफिल लूट ली। इसके मुख्य अतिथि इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी एवं उनकी पत्नी रेखा अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कवि सम्मेलन में कवि डॉ. कुमार विश्वास ने जग भर के अपराध अपने शीशों पर उठाए, रस का माखन सबने खाया, लेकिन चोर हम ही कहलाए, दुनिया जीती, लेकिन गांधारी का श्राप हमने ही खाया।

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इसी प्रकार उन्होंने मैं अपनी गीत गजलों से उसे पैगाम करता हूं, उसी की दी हुई दौलत उसके नाम करता हूं। हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना, वो अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूं। किसी के दिल की मायूसी जहां से हो के गुजरी है, कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है। पुकारे आंख में चढ़कर तो खूं को खूँ समझता है। मोहब्बत एहसासों की पावन सी कहानी है, समंदर पीर के अंदर है लेकिन रो नहीं सकता। चलो अब लौट चलें रघुराई जन जन के हित इस निर्जन में हमने उमर खपाई।

इसी प्रकार कवि दिनेश बावरा ने वर्तमान राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि दबाव बनाने की प्रक्रिया ऐसे ही जारी रही तो सरकार से नोटिस आ सकती है कि अब यूरिया भगवा रंग की बनाइए। कवि दिनेश बावरा की इस प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए। इसी क्रम में कवित्री कृति चौबे राम अधिकार हैं याचनाए नहीं, राम युग दरस हैं मान्यताएं नहीं। राम को साधनाओं से मत साधिए, राम तो आचरण हैं कथाएं नहीं। राम बने तो कैसे बने देवता, राम आमजन हैं आमजन राम हैं।

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कवि रमेश मुस्कान ने सेना की भर्ती की लाइन में खड़े एक बूढ़े को देखकर आफीसर गरमाया, उसने बूढ़े से कुछ इस तरह फरमाया, बुड्ढे शमशान प्रतीक्षा कर रहा है, और तू सेना में भर्ती हो रहा है। क्या दिमाग में कीड़े पड़े हैं। बूढ़े ने जवाब दिया कि नंबर आते आते हम बूढ़े हो गए, लाइन में तो हम जवानी से खड़े हैं।

कवि सम्मेलन का संचालन दिनेश बावरा ने नई पीढ़ी को आगाह करते हुए कहा कि खतरा न चीन से है, न पाकिस्तान से है, और न इजराइल से है, इस दुनिया को सबसे ज्यादा खतरा आपके जेब में रखे मोबाइल से है। अपने हौसले को बुलंद करना सीखिए, मोबाइल चलाना तो सीख लिया, अब थोड़ी देर बंद करना सीखिए। संचालन एसके सिंह ने किया। मौके पर वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक संजय कुदेशिया, उप महा प्रबंधक कार्मिक एवं प्रशासन शंभू शेखर, इफको इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष पंकज पांडेय, महामंत्री विनय यादव, इफको आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग तिवारी, महामंत्री स्वयं प्रकाश रहे।
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