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Kolkata Incident : सात दिन में आठ हजार मरीज इलाज के लिए भटके, एसआरएन की स्थित सबसे ज्यादा खराब

Mon, 19 Aug 2024 01:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

देशभर के जूनियर व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 12 अगस्त को हड़ताल पर चले गए। इसके बाद से दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगीं। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के निर्देश पर सीनियर कन्सल्टेंट ने मोर्चा संभाला, लेकिन यह प्रयोग भी विफल रहा।
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एसआरएन अस्पताल में प्रदर्शन करते जूनियर डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कोलकाता की घटना के विरोध में हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं। एक हफ्ते में आठ हजार मरीजों को इलाज का संकट रहा। इसमें पांच हजार तो सिर्फ एसआरएन अस्पताल की ओपीडी के हैं। इसके अलावा शनिवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की हड़ताल में शामिल होने से 24 घंटे में तीन हजार से अधिक मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ गया। रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल फिलहाल, समाप्त होती नजर नहीं आ रही है।

देशभर के जूनियर व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 12 अगस्त को हड़ताल पर चले गए। इसके बाद से दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगीं। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के निर्देश पर सीनियर कन्सल्टेंट ने मोर्चा संभाला, लेकिन यह प्रयोग भी विफल रहा। एसआरएन में रोजाना एक हजार से अधिक मरीज चिकित्सक को बिना दिखाए वापस होने लगे। इसका प्रमुख कारण रजिस्ट्रेशन काउंटर का बंद होना था।

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शुरुआती तीन दिनों तक सोमवार 850, मंगलवार 830 और बुधवार को 760 के करीब पर्चे बनाए गए। लेकिन, शुक्रवार और शनिवार को हालात बद से बत्तर हो गए। शुक्रवार को 100 से कम पर्चे बने। वहीं, शनिवार को ट्रामा व इमरजेंसी को छोड़ एक भी ओपीडी नहीं चली। हड़ताल के दौरान एक हफ्ते में करीब 90 लोगों के ऑपरेशन टल गए। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे और सीटी स्कैन की जांच करीब 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित रही। सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीज के खून की जांच के सैंपल लिए गए। इसके अलावा एमआरआई भी प्रतिदिन चार से पांच मरीज में समिट गई।

सचिन को नहीं मिल पा रहा इलाज

10 मिनट के लिए प्रयागराज के कमिश्नर और कैंसर पीड़ित सचिन प्रजापति को हड़ताल के चलते सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। यूरिन में समस्या बढ़ने की वजह से सचिन को शनिवार को एसआरएन में यूरोलॉजी विभाग में दिखाने लाया गया। लेकिन, मौके पर चिकित्सक नहीं मिले। इसके बाद उसे वार्ड 14 में भर्ती कर दिया गया। लेकिन, यहां पर सिर्फ ग्लूकोज चढ़ाने के अलावा सचिन का कोई इलाज नहीं आ पा रहा है। पिता रामधनि प्रजापति का कहना है कि हड़ताल की वजह से कोई देखने नहीं आ रहा है।


मुझे नहीं पता कि सचिन शनिवार को दिखाने आया था। अगर कोई समस्या थी तो प्रमुख अधीक्षक से मिलना चाहिए था। हमारे सभी सीनियर कन्सल्टेंट मौजूद थे। मैं तुरंत मरीज को दिखवाती हूं। - डॉ.वत्सला मिश्रा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

डेंटल एसोसिएशन की हड़ताल जारी, बंद रहे सभी क्लीनिक

इंडियन डेंटल एसोसिएशन(आईडीए) की हड़ताल के दूसरे दिन रविवार को जिले के सभी 450 डेंटल क्लीनिक और अस्पताल बंद रहे। इस दौरान गंभीर मरीजों को ही देखा गया। सिविल लाइंस स्थित होटल में प्रेसवार्ता में आईडी के प्रदेश सचिव डॉ.सचिन प्रकाश ने कोलकाता मामले में प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामले के लिए फास्ट ट्रक कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए। इस दौरान डॉ.प्रदीप अग्रवाल, डॉ.अमित शुक्ला, डॉ.संदीप शुक्ला, डॉ.आशुतोष चौधरी और डॉ.अमरजीत गुलेरी रहे।

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नर्सिंग होम एसोसिएशन ने किया हड़ताल का समर्थन
 

रेजिडेंट डॉक्टरों के समर्थन में इलाहाबाद नर्सिंग होम एसोसिएशन भी उतर गया है। रविवार को एसोसिएशन संग इलाहाबाद गायनी सोसाइटी, पूनम संत समाज, लेडीज क्लब, मानवाधिकारी सोसाइटी, जायसवाल समाज, रोटरी, लायन क्लब, इनरव्हील, व्यापार मंडल सहित कई अन्य सामाजिक संगठनों ने पत्थर गिरजाघर से सुभाष चौराहे तक मार्च निकाला। इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.राज किशोर अग्रवाल, सचिव डॉ.व्यंजना पांडेय, पूर्व अध्यक्ष डॉ.अवनीश सक्सेना, डॉ.आशीष टंडन, डॉ.बीबी अग्रवाल, डॉ.निकुंज कुमार अग्रवाल, डॉ.भगवान पांडेय व डॉ.ओमार हसन रहे।
 

कैंडल मार्च निकाल दिवंगत डॉक्टर को दी श्रद्धांजलि
 

संस्थाओं ने कैंडल मार्च निकालकर दिवंगत डॉक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित की। सिविल लाइंस व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुशील खरबंदा ने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा देनी चाहिए। इस मौके पर सिविल लाइंस व्यापार मंडल के आशीष अरोड़ा, डॉ. सुभाष यादव, शशांक जैन, हेमा भार्गव मौजूद रहीं। इलाहाबाद जन कल्याण समिति की ओर से करेलाबाग में कैंडल मार्च निकाला गया। परशुराम चौहान, कृष्ण गोपाल, मोहम्मद नासिर जुबैर अहमद, कृष्ण सिंह, सुनील प्रजापति मौजूद रहे।

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