सांसद केशव प्रसाद मौर्य के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब प्रदेश संगठन में भारी फेरबदल होना तय माना जा रहा है। इलाहाबाद में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष को हटाए जाने के भी आसार बन गए हैं। एमएलसी चुनाव में केशव की अनदेखी कर प्रत्याशी चयन मामले में इलाहाबाद के जिलाध्यक्ष पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रदेश कार्यकारिणी में भी केशव अपने कुछ विश्वसनीय लोगों को शामिल कर सकते हैं।
केशव प्रसाद 11 अप्रैल को दिल्ली से लखनऊ आकर औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे। कयास लगाया जा रहा है कि उनके कार्यभार संभालने के बाद वे जल्द से जल्द प्रदेश संगठन में व्यापक फेरबदल कर देंगेे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी द्वारा सूबे के कई जिलों के जिलाध्यक्ष एवं नगर अध्यक्ष को बदला गया था। बावजूद इसके प्रदेश के 18 जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष उन्होंने नहीं बदले थे। इसमें इलाहाबाद भी प्रमुख रूप से शामिल है। गृहजनपद होने की वजह से केशव इलाहाबाद के ज्यादातर भाजपाई नेताओं की कार्यशैली से परिचित हैं।
उन्हें मालूम है कि कौन खांटी नेता है और कौन सिर्फ समाचार पत्रों में छपने के लिए है। ऐसे में माना जा रहा है कि इलाहाबाद में जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष के नाम पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को वह चौंका सकते हैं। इतना ही नहीं इलाहाबाद और कौशाम्बी से वह अपने कुछ विश्वसनीय नेताओं को प्रदेश संगठन में भी जगह दे सकते हैं। काशी क्षेत्र पर भी उनकी नजर है। पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से वह वाराणसी के जिला संगठन और नगर संगठन में शायद ही फेरबदल करें। हालांकि काशी क्षेत्र में पूर्वांचल के अन्य जिलों में वह विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कुछ फेरबदल जरूर कर सकते हैं।