पुत्र ने भी किया पिता का अनुसरण, 23 वर्ष से कल्पवास
प्रयागराज। पिता से प्रभावित होकर दूधनाथ पांडेय भी 23 साल से कल्पवास कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके पिता 16 वर्ष की उम्र से ही गांव वालों के साथ पैदल 70 किमी की यात्रा तय कर संगम स्नान करने आते थे। वह शिविर के एक कोने में श्रद्धा, समर्पण और आस्था के साथ जप, तप, साधना करते हैं। संकल्प के बाद पिता पुण्य के लिए तीन बार गंगा स्नान करते हैं। उनकी इच्छा है कि अगले साल लगने वाले महाकुंभ में वह तीसरी बार भी शैय्या दान करें। दूधनाथ बताते हैं कि जब से मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का आशीष मिला है तब से जीवन के सभी कष्ट दूर हो गए हैं। हमारी आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा को निभाएगी।