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नाक के नीचे झोलाछाप, अधिकारी बेखबर

Wed, 17 Dec 2014 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अब तक जितने अभियान चलाए गए हैं, सब कागजों तक सिमटकर रह गए हैं। विभागीय अधिकारियों ने एकाध बार अभियान भी चलाया, कई डॉक्टरों को नोटिस भी जारी की गई लेकिन इन अभियानों का कोई मतलब नहीं निकला। सभी झोलाछाप प्रैक्टिस कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वह महज जांच की कार्रवाई कर सकते हैं। बाकी जांच की पूरी प्रक्रिया पुलिस या फिर प्रशासन की है।
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जिले के गंगापार या फिर गंगापार की बात छोड़ें, शहर में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों की कोई जानकारी विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है। इन डॉक्टरों की न तो कोई सूची है और न ही कभी कोई कार्रवाई की गई। यह स्थिति तब है जब शहर में कोई ऐसा मोहल्ला नहीं है जहां झोलाछाप डॉक्टर न हो। इन्हीं डॉक्टराें के चलते कई शहरियों की जान तक चली गई। कई झोलाछाप के क्लीनिक पर जमकर तोड़फोड़ की गई, जबकि कई के खिलाफ मुकदमे तक दर्ज कराए गए। हालांकि बाद में सब कुछ रफा-दफा हो गया।


हिम्मतगंज, तेलियरगंज, सिविल लाइंस,  मम्फोर्डगंज, कटरा, राजापुर,  जानसेनगंज, नुरुल्लारोड, चौक, करेली, अशोकनगर, दरियाबाद, राजरूपपुर, चकिया, करेलाबाग, सोहबतियाबाग, अटाला, मीरापुर, टैगोरटाउन जार्जटाउन, दारागंज, समेत शहर के विभिन्न इलाकों में झोलाछाप डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। लेकिन इन डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। ज्यादातर झोलाछाप ने एक कमरे में बगैर नेमप्लेट की क्लीनिक खोल रखी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि  ऐसे डॉक्टरों को चिह्नित करना आसान नही है।
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विभागीय अधिकारियों को झांसा दिया जा सके, इसके लिए झोलाछाप डॉक्टर लेटर हेड  के बजाए बिना नाम पते वाली पर्ची पर मरीजों को दवाइयां लिख रहे हैं। पूर्व मेें ऐसे कई डॉक्टरों की पर्चियां मेडिकल स्टोरों की जांच में पकड़ी गई थीं लेकिन विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई होने से ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कुछ भी नहीं हुआ। झोलाछाप डॉक्टर ऐसी शैली व कोड वर्ड में दवाएं लिख रहे हैं कि उनसे जुड़े मेडिकल स्टोर संचालक ही नाम पड़ सकें।
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