फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रदेश के कॉलेजों में सात वर्ष से शिक्षकों की भर्ती नहीं

Tue, 16 Dec 2014 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
 इलाहाबाद विश्वविद्यालय और कालेजों में तथा प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी की वजह से पढ़ाई की गुणवत्ता पर चर्चा तो दूर कक्षाएं तक नहीं चल पा रहीं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विद्यार्थी बिना पढ़ाई के ही परीक्षा देने के लिए मजबूर हैं। प्रथम वर्ष के विद्यार्थी तो लैब देख ही नहीं पाते। कालेजों की स्थिति तो और भी खराब है। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कालेजों को पत्र लिखकर नया सत्र शुरू होने से पहले शिक्षकों की भर्ती का निर्देश दिया है। अन्यथा, फंड रोकने की चेतावनी दी। इसके बाद भी हाल-फिलहाल हालात में बहुत परिवर्तन की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में वर्षों से शिक्षकाें की भर्ती नहीं हुई है। विश्वविद्यालय में इस समय 400 से कम शिक्षक हैं। इसके विपरीत रिक्त पदों की संख्या पांच सौ से अधिक है। यानी, आधे से अधिक पद खाली हैं। कालेजों में तो कई विषयों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। इसमें विज्ञान के विषय भी शामिल हैं। ऐसे में पढ़ाई की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके विपरीत विश्वविद्यालय में अभी नए कुलपति की में देरी की बात कही जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय और कालेजों में शिक्षकों की उम्मीद भी नहीं है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा इसके संघटक कालेजों से इतर सूबे के अन्य महाविद्यालयों में भी सात साल से कोई भर्ती नहीं हुई है। दो भर्तियों के तहत दो हजार से अधिक पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं लेकिन विवादों की वजह से प्रक्रिया ठप है। इन पर फिलहाल फैसला की भी उम्मीद नहीं है। हालांकि इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर के 1652 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। ये शिक्षक मिल गए तब भी रिक्त पदों की तुलना में यह बहुत कम संख्या होगी।
विज्ञापन


इलाहाबाद में उच्च शिक्षा के लिए संस्थान तो हैं लेकिन उनमें जरूरी सुविधाओं का घोर अभाव है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में तो क्लासरूम तक की कमी है। यह गिनती के उन विश्वविद्यालयों में शामिल है जहां क्लासरूम के लिए छात्र-छात्रा तो आंदोलनरत रहे ही, विभागाध्यक्ष तक को धरना देना पड़ा। इसके बाद भी स्थाई समाधान नहीं हो सका है। इतना ही नहीं स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थी लैब तक देख ही नहीं पाते। शिक्षकों की कमी और लैब में जगह नहीं होने की वजह से प्रायोगिक कक्षाओं की औपचारिकता ही निभाई जाती है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय संभवत: अकेला संस्थान होगा जहां छात्र-छात्राओं को लाइब्रेरी से किताबें निर्गत नहीं होतीं। इसके लिए छात्र लगातार आंदोलनरत हैं। मांग पूरा होने का कई बार लिखित आश्वासन भी मिला लेकिन किताबें नहीं मिलीं। इसे लेकर विद्यार्थी अब भी आंदोलननरत हैं।

 भारत सरकार हर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का पूल तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव भी मांगा गया है लेकिन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्थिति ठीक उलट है। आधुनिक सुविधाएं तो दूर विश्वविद्यालय में सिर्फ क्रिकेट और बॉक्सिंग के कोच हैं। अन्य खेल उधार के कोच के भरोसे हैं। इसका नतीजा है कि विश्वविद्यालय में कई वर्षों से किसी भी खेल में कोई मेडल नहीं आया है और यहां दाखिला लेने वाली खेल प्रतिभाओं के कॅरियर पर ग्रहण लग गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें