यदि गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमा दर्ज है या जेल गए हैं तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को इस बाबत हलफनामा भी देना पड़ेगा। कार्यपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में छात्रों के लिए बनी नियमावली को मंजूरी दे दी गई। इसमें प्रवेश में इस प्रावधान को लागू करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
विश्वविद्यालय के इस फैसले से विभिन्न आंदोलनों में जेल गए तथा तोड़फोड़, आगजनी जैसे मामलों में निरुद्ध छात्रों को भी दाखिला से वंचित होना पड़ सकता है। हालांकि अभी बैठक का मिनट्स तैयार नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों का कहना है कि किस तरह के मुकदमों में प्रवेश प्रतिबंधित होगा इसकी समीक्षा की जानी है। इसके प्रारूप की भी समीक्षा होनी है।
विश्वविद्यालय की गिरती साख तथा बढ़ती अराजकता को ध्यान में रखकर छात्र नियमावली बनाई गई है। इसमें आंदोलन के दौरान परिसर में तोड़फोड़, शिक्षकों के साथ बदतमीजी, तालाबंदी जैसी गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। इसी के अंतर्गत आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं को दाखिला से रोके जाने का भी प्रावधान किया गया है।
इसके मद्देनजर गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमा दर्ज होने पर प्रवेश से वंचित करने का भी प्रावधान है। विश्वविद्यालय तथा लोक सेवा आयोग तथा अन्य भर्ती संस्थाओं की भर्तियों में अनियमितता के खिलाफ आंदोलन में शामिल छात्र-छात्राओं पर भी 7-सीएलए, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, काम में बाधा पहुंचाना जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज है। कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा है।
इस नियम के लागू होने के बाद उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश से रोका जा सकता है। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि विद्यार्थी को प्रवेश के समय एंटी रैंगिंग के साथ इसका भी हलफनामा देना होगा। यदि पढ़ाई के दौरान मुकदमा की जानकारी होती है तब भी प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रावधान का प्रारूप क्या होगा तथा किन-किन धाराओं में प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा। इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।