कहा, खाली पद भरने में याची को भी शामिल किया जाय। निरीक्षक ने याची का दावा खारिज कर दिया, जिसे दोबारा चुनौती दी गई। निरीक्षक का आदेश रद्द कर कोर्ट ने याची को 1998 से 2012 तक कार्य के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके बाद निरीक्षक ने यह कहते हुए वेतन भुगतान से इन्कार कर दिया कि याची की मूल नियुक्ति ही अवैध थी।
प्रबंध समिति ने नियमों का पालन नहीं किया था। जिसे भेजा गया, उसे ज्वाइन नहीं कराया और शॉर्ट टर्म रिक्ति पर याची की नियुक्ति कर ली। कोर्ट ने कहा, इस मुद्दे पर कोर्ट में आपत्ति की गई थी। दस वर्ष पहले कोर्ट ने निरीक्षक को याची के वेतन का भुगतान करने का आदेश दिया है, जिसे चुनौती नहीं दी गई। अब उसी आधार पर निरीक्षक को वेतन देने से इन्कार करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि इस आदेश से बकाया वेतन के अलावा याची को अन्य कोई अधिकार नहीं मिलेगा।