इनके चयन से किसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके उलट स्वास्थ्य विभाग को ही कुछ मदद मिलेगी। स्टाफ नर्स के लिए यूपीपीएससी ने 2021 में विज्ञापन निकाला था। इसमें स्टाफ नर्स के रूप में काम का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को तीन अंक प्रति वर्ष की दर से अधिकतम 15 अंक दिए जाने थे। इसके लिए सक्षम अधिकारी की ओर से जारी प्रमाणपत्र ही मान्य था।
रेनू व अन्य ने फॉर्म भरने के दैारान जो अनुभव प्रमाण पत्र लगाया, उसमें स्टाफ नर्स की जगह नर्स मेंटर दर्ज था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, रामपुर ने इसे अपनी चूक मानते हुए दूसरा प्रमाणपत्र जारी किया। याचीगण ने इसी आधार पर 5 सितंबर 2022 को आयोग से चयनित घोषित करने की प्रार्थना की, लेकिन आयोग ने इसे नहीं माना।
रेनू और अन्य ने हाईकोर्ट की शरण ली, जिसमें एकल पीठ ने उनके हक में फैसला दिया। इसके खिलाफ यूपीपीएससी ने अपील की। कहा, निर्धारित तिथि के बाद अनुभव प्रमाण पत्र दिया गया है, जिसके आधार पर चयन नहीं किया जा सकता। विपक्षीगण के अधिवक्ता ने कहा, यह निर्धारित तिथि के बाद प्रमाण पत्र दाखिल करने का नहीं, बल्कि प्रमाण पत्र में त्रुटि सुधार का मामला है।