बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय एवं बेसिक शिक्षा निदेशालय के महत्वपूर्ण कार्यालयों को लखनऊ स्थानांतरित किए जाने के निर्णय का चौतरफा विरोध शुरू हो गया। शुक्रवार को यह मुद्दा विधान परिषद में उठा, जहां सरकार को जवाब देना पड़ा कि इस निर्णय पर विचार किया जाएगा। वहीं, तमाम शिक्षक संगठनों ने भी इस निर्णय का विरोध किया और ज्ञापन देकर बेसिक शिक्षा परिषद के मुख्यालय स्थानांतरण का निर्णय वापस लिए जाने की मांग की।
सपा के वरिष्ठ नेता एमएलसी बासुदेव यादव ने शुक्रवार को यह मुद्दा विधान परिषद में उठाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रयागराज की पहचान को खत्म कर रही है। उन्होंने बेसिक शिक्षा परिषद का मुख्यालय स्थानांतरित किए जाने के निर्णय पर अपना विरोध दर्ज कराया। विधान परिषद अध्यक्ष के मौजूद न होने के कारण शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी पीठ के अधिष्ठाता थे। सुरेश त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देने के लिए कहा, जिसके बाद उप मुख्यमंत्री की ओर से जवाब दिया गया कि इस निर्णय पर विचार किया जाएगा।
उधर, शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीयिल कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपर निदेशक माध्यमिक अंजना गोयल को ज्ञापन देकर बेसिक शिक्षा परिषद एवं बेसिक शिक्षा मुख्यालय के महत्वपूर्ण कार्यालयों को लखनऊ शिफ्ट किए जाने के निर्णय पर विरोध दर्ज कराया। वहीं, माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी इस निर्णय का पुरजोर विरोध किया। जिलाध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी विभागों के कार्यालय को प्रयागराज में ही रखे जाने की मांग की। बैठक में महेश दत्त शर्मा, कुंज बिहारी मिश्र, रमेश चंद्र शुक्ला, जगदीश प्रसाद आदि मौजूद रहे।
वहीं, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार प्रयागराज के महत्व को कम करने के लिए साजिश कर रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी सांसदों एवं विधायकों से मिलकर निवेदन करेंगे कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्थानांतर पर रोक लगाई जाए। अटेव पेंशन बचाओ मंच की बैठक में भी विरोध दर्ज कराया गया और आरोप लगाया गया कि सरकार प्रयागराज की अस्मिता से खिलवाड़ कर रही है। बैठक में डॉ. हरि प्रकाश यादव, उपेंद्र वर्मा, सुधीर गुप्ता, अशोक कनौजिया, सुरेंद्र प्रताप सिंह, अरुण कुमार आदि मौजूद रहे।