स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में जूनियर क्लर्क द्वारा 88 हजार रुपये वेतन लेने के मामले की जांच शुरू हो गई है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने वित्त नियंत्रक की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बैठा दी है। इसके साथ ही बाबू की दो महीने की वेतन पर्ची देखकर मामले को प्रथम दृष्टया सही पाया है। बाबू को एसआरएन चिकित्सालय से हटाकर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसपीएम विभाग में संबद्ध कर दिया गया।
एसआरएन में एक बाबू द्वारा प्रतिमाह 88 हजार रुपये का वेतन लेने की अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने वित्त नियंत्रक शिवेंद्र सिंह, प्रोफेसर मोहित जैन और क्रय सचिव डॉ. राजेश कुमार राय की अगुवाई में एक जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी ने जूनियर लिपिक की दो महीने की सैलरी की रैंडम जांच की।
पाया कि जूनियर लिपिक वरिष्ठ लिपिक और कार्यालय प्रमुख से अधिक वेतन ले रहा है। इस आधार पर उसे तुरंत स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय से हटाकर मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित एसपीएमडी विभाग से संबद्ध कर दिया गया। मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। इस संबंध में डीजी और शासन को भी सूचित कर दिया गया है। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद बाबू के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जूनियर लिपिक दे रहा आत्महत्या की धमकी
अधिक सैलरी लिए जाने के मामले में जांच शुरू होने पर जूनियर लिपिक ने परिवार सहित आत्महत्या की धमकी है। जूनियर लिपिक ने स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक को एक पत्र भेजा है। उसमें कहा है कि उसने अपनी सैलरी मेें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की है। उसने इस संबंध में चिकित्सालय के एक दूसरे बाबू पर आरोप लगाया है।