यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट का इस बार का रिजल्ट दस वर्षों में सबसे खराब रहा। इंटरमीडिएट का सबसे बेहतर परिणाम वर्ष 2013 और 2014 का था। दोनों बार उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 92 फीसदी से अधिक थी, लेकिन इस दफे 70.06 फीसदी अभ्यर्थी ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सके। वहीं, हाईस्कूल का रिजल्ट पिछले साल के मुकाबले इस बार कुछ ठीक रहा, लेकिन उससे पहले वर्ष 2012 से 2017 तक के छह साल का परिणाम इस बार के रिजल्ट से बेहतर था।
इंटरमीडिएट के वर्ष 2010 से 2017 तक के आठ साल का रिजल्ट को देखा जाए तो किसी भी वर्ष परिणाम 80 फीसदी से नीचे नहीं गया। पिछले वर्ष 2018 में इंटरमीडिएट का परिणाम सीधे दस फीसदी नीचे आ गया था। इस बार भी इंटरमीडिएट के रिजल्ट ने झटका दिया और परिणाम 2.37 फीसदी घट गया। इंटरमीडिएट के रिजल्ट का ग्राफ वर्ष 2014 से गिरना शुरू हुआ, फिर हर साल विद्यार्थियों के उत्तीर्ण प्रतिशत में लगातार कमी होती गई। वहीं, हाईस्कूल में पिछले वर्ष 75.16 फीसदी अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे और इस बार परिणाम कुछ बेहतर रहा। उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में 4.91 फीसदी का इजाफा हुआ है।
पिछले दस वर्षों का परिणाम
इंटरमीडिएट
वर्ष -
उत्तीर्ण प्रतिशत
2010 - 80.54
2011 - 80.14
2012 - 89.40
2013 - 92.68
2014 - 92.21
2015 - 88.83
2016 - 87.99
2017 - 82.62
2018 - 72.43
2019 - 70.06
हाईस्कूल
वर्ष -
उत्तीर्ण प्रतिशत
2010 - 70.79
2011 - 70.82
2012 - 83.75
2013 - 86.63
2014 - 86.71
2015 - 83.74
2016 - 87.66
2017 - 81.18
2018 - 75.16
2019 - 80.07