कोर्ट ने विपक्षी वकीलों को दो हफ्ते में जवाबी हलफनामा सहित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही बार काउंसिल से पूछा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो इनके खिलाफ किस तरीके की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी की श्रीमती फूला देवी की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है साथ ही इनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर अस्थायी निर्माण कराने वाले 11 वकीलों सहित जिला जज कौशाम्बी व उत्तर प्रदेश बार कौंसिल को याचिका में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
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कोर्ट ने विपक्षी वकीलों को दो हफ्ते में जवाबी हलफनामा सहित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही बार काउंसिल से पूछा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो इनके खिलाफ किस तरीके की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने याची फूला देवी के खिलाफ जमीन को लेकर विपक्षी वकीलों की किसी भी शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी है। याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 18 अप्रैल नियत की है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने अधिवक्ता बी पी सिंह कछवाह को सुनकर दिया है। कोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी ने जानकारी उपलब्ध कराई जिसमें खुलासा किया गया कि जमीन याची की है 2015 में भी कुछ दबंगों ने कब्जा किया था जिन्हें बेदखल कर याची को कब्जा सौंपा गया था। जिसपर फिर से कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है और अस्थायी निर्माण कर लिया है। गेट व बाउंड्री कर ली है। वे सभी वकील हैं।
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कोर्ट ने इसे बेहद परेशान करने वाली अस्वीकार्य घटना कहा। कोर्ट ने कहा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ आदेश जारी करने से पहले उन्हें पक्षकार बनाकर सफाई ली जानी चाहिए। कोर्ट ने आरोपी अतिक्रमण करने वाले वकीलों अजय कुमार पाण्डेय, नर नारायण मिश्र, कौशलेश द्विवेदी, शशि प्रताप त्रिपाठी, विजय कुमार शर्मा, धनंजय विश्वकर्मा, धर्मराज पाल,अभय पाल, धीरेंद्र त्रिपाठी, गोपाल शुक्ल व मनुदेव त्रिपाठी को नोटिस जारी किया है।